- जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र जैन महावीर को मिला विशिष्ट सम्मान
इंदौर (विश्व परिवार)। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के संस्थापक अध्यक्ष, जैन रत्न स्वर्गीय श्री प्रदीप कुमार सिंह कासलीवाल की षष्ठम पुण्यतिथि के अवसर पर शिक्षक दिवस, 5 सितंबर को इंदौर के दलाल बाग में समाजसेवी उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। चातुर्मासरत निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित समारोह में शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षाविदों एवं शिक्षकों का सम्मान किया गया।
स्वर्गीय प्रदीप कासलीवाल समाज को निडर, सुशिक्षित और सक्षम बनाने में लगे रहे : मुनिश्रीसुधासागर जी
अपने आशीर्वचन में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि स्वर्गीय प्रदीप कुमार सिंह कासलीवाल ने समाज को सही राह देने का कार्य किया। वे समाज को निडर, सुशिक्षित और सक्षम बनाने में निरंतर लगे रहे। उनके परिवार को आशीर्वाद देते हुए मुनिश्री ने कहा कि उनके द्वारा किए गए समाजहित के कार्य सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
उपस्थित शिक्षकों का आह्वान करते हुए मुनिश्री ने कहा कि आप कहीं भी रहें, आपके व्यक्तित्व और कार्यों से जैन समाज की छाप दिखाई देनी चाहिए। शिक्षक कर्मचारी बनकर नहीं, गुरु बनकर ज्ञान दें। सरकार ने भले ही आपको कर्मचारी बना दिया हो, लेकिन बच्चों को पढ़ाते समय गुरु बनकर पढ़ाएं। बच्चों को इतना अच्छा पढ़ाएं कि उन्हें ट्यूशन की आवश्यकता ही न पड़े।
मेरा वर्तमान मेरे भक्त का भविष्य बन जाए
मुनिश्री ने कहा कि विश्व का एकमात्र दर्शन जैन दर्शन है, जिसमें भगवान महावीर की भावना है—‘मेरा वर्तमान मेरे भक्त का भविष्य बन जाए।’ उन्होंने कहा कि शिक्षक का वर्तमान तभी सार्थक है, जब उसके द्वारा दी गई शिक्षा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बने।
उन्होंने संपूर्ण समाज से आग्रह किया कि प्रत्येक जैन व्यक्ति की अपनी विशिष्ट पहचान होनी चाहिए। जैन व्यक्ति डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, शिक्षक हो अथवा किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो, उसके कार्य और आचरण की ऐसी पहचान हो कि लोग कहें—यह कार्य किसी जैन व्यक्ति ने किया है।
मुनिश्री ने कहा कि जैन संस्कार और आचरण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देना चाहिए। व्यक्ति को देखकर सामने वाला कह सके—‘लगता है, तुम जैन हो।’ यही जैन होने की सार्थक पहचान है।
प्रमुख शिक्षाविदों एवं समाजसेवी शिक्षकों का सम्मान
समारोह में शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डीएवीवी के डॉ रजनीश जैन, जैन स्टडीज सेंटर के डॉ राहुल सिंघई, आईआईटी इंदौर के डॉ ललित जैन, अटल बिहारी संस्कृत महाविद्यालय इंदौर संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता मेहता, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति राकेश सिंघई, रेनेसा एवं अभ्युदय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. स्वप्निल कोठारी तथा सनावद के शिक्षाविद् एवं समाजसेवी ,जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र जैन ‘महावीर’ सनावद को विशेष रूप से समाजसेवी उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया। ग्रुपों द्वारा चयनित लगभग 32शिक्षक सम्मानित हुए।
सभी ग्रुपों के पदाधिकारीयों के साथ शिरोमणि संरक्षक पुष्पा जी कासलीवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, निवृत्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, महावीर ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल, अष्टापद बद्रीनाथ के अध्यक्ष आदित्य कासलीवाल, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, नवीन गोधा, मनीष सपना गोधा , पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल अजमेरा,कमलेश कासलीवाल, टी के वेद, राष्ट्रीय महासचिव विनय जैन, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अश्विन कासलीवाल इंदौर रीजन के अध्यक्ष प्रदीप नीना चौधरी, वितुल प्रीति अजमेरा, संजय सपना पापड़ीवाल ,अतुल सारिका गोइल आदि ने शिक्षकों को सम्मानित किया।
सम्मानित शिक्षाविदों एवं शिक्षकों को प्रशस्ति-पत्र, शाल एवं दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में शिक्षक सम्मान के साथ शिक्षक की सामाजिक भूमिका, जैन संस्कारों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व पर भी सार्थक संदेश दिया गया।
आचरण पत्थर पर लिखी इबारत है : डॉ. स्वप्निल कोठारी
रेनेसा एवं अभ्युदय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं शिक्षाविद् डॉ. स्वप्निल कोठारी ने कहा कि जिससे मिलने के बाद व्यक्ति के मन में प्रश्न, उम्मीद और जिज्ञासा पैदा हो जाए, वही सच्चा शिक्षक होता है। उन्होंने कहा कि विचार पानी पर लिखी हुई इबारत हैं, जबकि आचरण पत्थर पर लिखी हुई इबारत है। व्यक्ति अपने आचरण को देखकर सीखता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का जीवन स्वयं विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी पाठशाला होता है। इसलिए शिक्षक का व्यवहार, संस्कार और आचरण ही उसके शिक्षण की वास्तविक पहचान बनता है।
‘मैं’ से ‘हम और हमारे’ की भावना के प्रस्तोता थे प्रदीप कासलीवाल : राजेंद्र जैन महावीर
जैन जगत के चिंतक-विचारक तथा अनेक पत्र-पत्रिकाओं के मानद संपादक राजेंद्र जैन ‘महावीर’, सनावद ने कहा कि स्वर्गीय प्रदीप कुमार सिंह कासलीवाल ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के माध्यम से समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया तथा तीर्थों को समुन्नत और आत्मनिर्भर बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि प्रदीप जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे सदैव ‘मैं’ की बजाय ‘हम और हमारे’ की भावना में विश्वास करते थे। वे स्वयं आगे बढ़ने के बजाय समाज को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते थे। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि जो भी व्यक्ति उनके संपर्क में आया, उसे आगे बढ़ने का अवसर मिला और अनेक लोग राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।
प्रदीप जी का जीवन समाज को जोड़ने, साथ लेकर चलने और सामूहिकता की भावना को मजबूत करने की प्रेरक यात्रा था। उनकी स्मृति में आयोजित यह सम्मान समारोह उनके समाजसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास है।
प्रदीप जी समाजसेवा के गौरवशाली प्रतीक थे : मनोहर झांझरी
दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर जी झांझरी ने स्वर्गीय प्रदीप कासलीवाल को गौरवशाली समाजसेवी बताते हुए कहा कि उन्होंने संगठन को नई दिशा और व्यापक विस्तार प्रदान किया। समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।
फेडरेशन के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका ने कहा कि प्रदीप जी सिविल इंजीनियर थे, लेकिन उन्होंने ‘सोशल इंजीनियर’ के रूप में समाज के विभिन्न वर्गों और व्यक्तियों को जोड़ने का कार्य किया। उनकी संगठन क्षमता और दूरदृष्टि सदैव स्मरणीय रहेगी।
शिक्षक दिवस को मिला समाज निर्माण का संदेश
समारोह में समाजसेवी, शिक्षाविद्, शिक्षक, फेडरेशन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने शिक्षक दिवस को केवल सम्मान का अवसर न बनाकर शिक्षा, संस्कार, आचरण और समाज निर्माण का प्रेरक पर्व बना दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन इंदौर रीजन अध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने किया। समारोह में स्वर्गीय प्रदीप कुमार सिंह कासलीवाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उनके समाजसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।







