धर्म

जिनदेवी माताजी ससंघ के सानिध्य में चूलगिरी अतिशय क्षेत्र पर रविवार को मनायेंगे आचार्य रत्न बाहुबली महाराज का 16 वां समाधि दिवस-होगा कल्याण मंदिर पूजा विधान

जयपुर (विश्व परिवार)। आचार्य रत्न बाहुबली महाराज की पट्ट शिष्या गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न जिनदेवी माताजी ससंघ के सानिध्य में आगरा रोड पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरी में रविवार को आचार्य बाहुबली महाराज का समाधि दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर प्रातः से ही कई धार्मिक आयोजन किये जाएंगे। वही शनिवार, 9 मई को आयोजित धर्म सभा में माताजी के मंगल प्रवचन हुए।
राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि गणिनी प्रमुख आर्यिका रत्न जिन देवी माताजी ससंघ के सानिध्य में आगरा रोड स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरी पर प्रातः मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की खडगासन प्रतिमा के जिनाभिषेक किये गए। विश्व में सुख शांति समृद्धि की कामना करते हुए शांतिधारा की गई।
इस मौके पर आयोजित धर्म सभा में माताजी ने अपने प्रवचनों में कहा कि मनुष्य का जीवन केवल कर्मों से बनता है।
जैसा कर्म, वैसा फल — यही संसार का अटल नियम है।
जब मनुष्य अच्छे कर्म करता है, दूसरों का भला करता है, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है, तब उसके जीवन में पुण्य का संचय होता है।
पुण्य केवल मंदिर जाने या दान देने से ही नहीं बनता।
किसी दुखी को सहारा देना, भूखे को भोजन कराना, माता-पिता की सेवा करना, सत्य बोलना, जीवों पर दया करना — ये सभी पुण्य के कार्य हैं।
पुण्य से मन में शांति आती है
जिस व्यक्ति के भीतर पुण्य होता है, उसका मन शांत रहता है।
वह विपरीत परिस्थितियों में भी टूटता नहीं, क्योंकि उसके अच्छे कर्म उसे भीतर से शक्ति देते हैं।
पुण्यवान व्यक्ति को सत्संग, अच्छे मित्र और श्रेष्ठ मार्गदर्शक मिलते हैं।
जैसे फूलों पर भँवरे स्वयं आ जाते हैं, वैसे ही पुण्य अच्छे लोगों को आकर्षित करता है।
परिवार में सुख और समृद्धि आती है
जहाँ धर्म, सेवा और दया होती है, वहाँ लक्ष्मी और सुख स्वयं आते हैं।
पुण्य का प्रभाव केवल व्यक्ति पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ता है।
पुण्य वह अदृश्य शक्ति है जो जीवन को सुंदर बनाती है।
धन समाप्त हो सकता है, शरीर बूढ़ा हो सकता है, लेकिन पुण्य का प्रभाव जन्म-जन्मांतर तक साथ रहता है।
“कर्मों की गूँज शब्दों से भी ऊँची होती है।”
इसलिए ऐसा जीवन जिएँ कि आपके कर्म दूसरों के लिए आशीर्वाद बन जाएँ।
जिनवाणी स्तुति के साथ धर्म सभा का समापन हुआ।
इस मौके पर दीन दयाल पाटनी, धर्मी चन्द कासलीवाल, विजय सोगानी, नरेन्द्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
रविवार, 10 मई 2026 को सुबह 6:30 बजे से गणिनी प्रमुख आर्यिका रत्न 105 जिन देवी माताजी ससंघ के सानिध्य में
प. पू. आचार्यरत्न बाहुबली महाराज के 16 समाधि दिवस का कार्यक्रम चूलगिरी क्षेत्र पर ही मनाया जाएगा और इस निमित्त प्रातः संगीतमय कल्याण मंदिर पूजा विधान का आयोजन भी होगा। प्रातः 9.00 बजे विनयांजलि सभा में प्रोजेक्टर पर आचार्य बाहुबली महाराज की जीवनी का प्रदर्शन किया जाएगा। विनयांजलि सभा में विद्वतजन उदबोधन देगें। आर्यिका माताजी के मंगल प्रवचन होगें।

 

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