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एम्स रायपुर ने बचाई 38 वर्षीय युवक की जान, 13 घंटे चली जटिल हृदय शल्य चिकित्सा सफल

रायपुर  (विश्व परिवार)। एम्स रायपुर के हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा (CTVS) विभाग ने एक अत्यंत जटिल और जानलेवा हृदय रोग से पीड़ित 38 वर्षीय युवक का सफल उपचार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सरगुजा जिले के निवासी इस मरीज को एक दुर्लभ और अत्यंत गंभीर हृदय संबंधी आपातकालीन स्थिति “एक्यूट स्टैनफोर्ड
टाइप-ए एओर्टिक डिसेक्शन” थी, जिसे चिकित्सा जगत में सबसे खतरनाक हृदय आपात स्थितियों में से एक माना जाता है। मरीज सीने में गंभीर समस्या के लक्षणों के साथ एम्स रायपुर पहुंचा। कार्डियोलॉजी ओपीडी में जांच के दौरान डॉ. सुरेन्द्र नायक ने इकोकार्डियोग्राफी के आधार पर गंभीर बीमारी की आशंका व्यक्त की। इसके बाद डॉ. एन. के. बोधे के परामर्श से तत्काल सीटी एओर्टोग्राम कराया गया, जिसमें एक्यूट टाइप-ए एओर्टिक डिसेक्शन की पुष्टि हुई।
यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर की मुख्य रक्त वाहिका (एओर्टा) की भीतरी परत फट जाती है। यदि समय पर उपचार न मिले तो मरीज की जान कुछ ही घंटों में जा सकती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी, सीटीवीएस, कार्डियक एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, आईसीयू, नर्सिंग एवं तकनीकी टीमों ने तुरंत समन्वय स्थापित किया। निदान की पुष्टि होने के मात्र 90 मिनट के भीतर मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।
इसके बाद रातभर चली लगभग 13 घंटे की जटिल सर्जरी में क्षतिग्रस्त एओर्टा को कृत्रिम ग्राफ्ट से बदला गया तथा एओर्टिक वाल्व का भी सफल प्रत्यारोपण किया गया। यह शल्य चिकित्सा डॉ. जी. सौरभ, डॉ. स्नेहा एवं सीटीवीएस टीम द्वारा की गई, जबकि कार्डियक एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुब्रत कुमार सिंघा ने किया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। छह दिन तक कार्डियक आईसीयू में निगरानी के बाद उसे वार्ड में स्थानांतरित किया गया और ऑपरेशन के दसवें दिन स्वस्थ एवं स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई। सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. नितिन कुमार कश्यप ने बताया कि इस बीमारी में उपचार में हर घंटे की देरी से मृत्यु का खतरा 1–2 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यजीत ने कहा कि समय पर पहचान और विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट समन्वय के कारण मरीज की जान बचाई जा सकी।
यह सफलता एम्स रायपुर की उन्नत हृदय शल्य चिकित्सा क्षमता का प्रमाण है और यह दर्शाती है कि संस्थान छत्तीसगढ़ एवं आसपास के राज्यों के मरीजों को विश्वस्तरीय हृदय चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है।

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