नई दिल्ली (विश्व परिवार)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा नकारात्मक राजनीति की है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सहकारिता और दुग्ध क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन का सबसे बड़ा लाभ गोपालकों और पशुपालकों को मिलने वाला है।
75 साल बाद बना स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय
भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित सम्मेलन में अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों की मांग रही थी कि केंद्र में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय बनाया जाए, लेकिन कांग्रेस के शासन में 75 साल तक ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना हुई, जिससे सहकारी व्यवस्था को नई दिशा मिली है।
सहकारी व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका होगी कम
दूध संग्रहण में बिचौलियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि खुले बाजार में दूध बेचने पर गोपालकों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता। उन्होंने दावा किया कि जहां बिचौलिये करीब 35 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध लेते हैं, वहीं सहकारी व्यवस्था से गोपालकों को 55 रुपए प्रति लीटर तक मिलने की शुरुआत हो सकती है। उन्होंने कहा कि सहकारी मॉडल से दूध उत्पादकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
मध्य प्रदेश को डेयरी क्षेत्र में कई परियोजनाओं की सौगात
अमित शाह ने उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत वाले दूध प्रसंस्करण संयंत्र का भूमिपूजन किया। इसके अलावा भोपाल में संयंत्र और प्रयोगशाला तथा शिवपुरी में मिनी डेयरी प्लांट की सौगात दी गई। कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों को 12 करोड़ रुपए का बोनस भी वितरित किया गया।
दूध उत्पादन बढ़ने को बताया सरकार की उपलब्धि
शाह ने कहा कि 2014-15 में देश का दूध उत्पादन करीब 14.60 करोड़ टन था, जो 10 वर्षों में बढ़कर 25 करोड़ टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और दुग्ध उत्पादन में देश के शीर्ष पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।
डेयरी क्षेत्र में प्रोसेसिंग इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि केवल दूध का संग्रहण बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे जुड़े पूरे मूल्यवर्धित इकोसिस्टम को विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दूध से आइसक्रीम, मक्खन, घी, चीज और मावा जैसे उत्पाद तैयार किए जाने चाहिए और इसके लिए आधुनिक प्रसंस्करण व्यवस्था तथा बाजार तक पहुंच का मजबूत नेटवर्क जरूरी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार गोबर से बायोगैस और जैविक उर्वरक तैयार करने से लेकर दुग्ध उत्पादों की प्रोसेसिंग और उन्हें बाजार तक पहुंचाने का पूरा इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
12 करोड़ रुपए का बोनस और ‘गोपाल दीदी’ का सम्मान
अमित शाह ने बताया कि भोपाल और इंदौर पशुपालक संघों से जुड़े पशुपालकों को 12 करोड़ रुपए का बोनस दिया गया है। इस दौरान ‘गोपाल दीदी’ को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में बड़ी संख्या में गोपालकों की भागीदारी मध्य प्रदेश में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लिए सकारात्मक संकेत है और यह पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नए संकल्प और ऊर्जा को दर्शाती है।
नवीन न्याय संहिताओं को लेकर भी बोले शाह
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने नए आपराधिक कानूनों का भी उल्लेख किया। भोपाल में नवीन न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के बनाए कानून तत्कालीन शासन और सरकार की रक्षा के लिए थे, जबकि नए कानूनों का उद्देश्य भारतीय नागरिकों की गरिमा, संपत्ति और जीवन की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का मूल सिद्धांत सजा नहीं, बल्कि न्याय है।







