- तिरंगे की शान और राष्ट्रभक्ति के संकल्प के साथ मनाया गया स्वतंत्रता दिवस समारोह
रायपुर (विश्व परिवार)। स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उन असंख्य वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिनके कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। इसी भाव, गौरव और देशभक्ति के साथ आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर में स्वतंत्रता दिवस समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुश्री मोना सेन तथा विशिष्ट अतिथि पद्मश्री उषा बारले, सहित विश्वविद्यालय के गणमान्य अतिथियों के आगमन एवं आत्मीय स्वागत के साथ हुआ।
इसके पश्चात मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया। आकाश में शान से लहराते तिरंगे को निहारते हुए उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद सामूहिक रूप से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ तथा छत्तीसगढ़ के राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ का गायन हुआ। इन पलों ने समारोह के वातावरण को भावनात्मक और आध्यात्मिक गरिमा से भर दिया।
समारोह में कुलपति डॉ. टी. रामा राव ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता हमें केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि अपने देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारियां भी सौंपती है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति अभिषेक अग्रवाल ने अपने स्वागत संबोधन में अतिथियों का अभिनंदन करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र के भविष्य की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए शिक्षा को केवल व्यक्तिगत सफलता का माध्यम न मानकर समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का साधन बनाने का संदेश दिया।
समारोह की विशिष्ट अतिथि पद्मश्री उषा बारले, जो छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका हैं, की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पंडवानी की कुछ पंक्तियों का सस्वर गायन कर उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी ओजपूर्ण और लोकमाटी से जुड़ी आवाज ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अनुभूति कराई। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि सुश्री मोना सेन ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को अत्यंत प्रेरणादायी और उत्साहवर्धक संदेश दिया। उन्होंने स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को समझने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को अपने सपनों के प्रति समर्पित रहते हुए कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने, सकारात्मक सोच रखने और समाज के लिए उपयोगी बनने की प्रेरणा दी।
स्वतंत्रता दिवस समारोह को विद्यार्थियों ने अपनी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से यादगार बना दिया। देशभक्ति नृत्यों में विश्वविद्यालय के अलग-अलग संकायों की प्रतिभा और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना दिखाई दी। इसके साथ ही देशभक्ति गीतों, एकल गायन और समूह प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावनाओं और ऊर्जा से भर दिया।
आंजनेय विश्वविद्यालय का यह स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता के मूल्य और अपने राष्ट्रीय दायित्व का एहसास कराया।







