नई दिल्ली (विश्व परिवार)। नीति आयोग ने सोमवार को अनुराग जैन का नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में स्वागत किया। उनकी नियुक्ति देश के प्रमुख नीति-निर्माण थिंक टैंक नीति आयोग में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखी जा रही है। मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को प्रशासन, सुशासन और नीति-निर्माण के क्षेत्र में करीब चार दशक का व्यापक अनुभव है। अपने लंबे और उल्लेखनीय प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों में कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाई हैं।
नीति आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “नीति आयोग नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग जैन का स्वागत करता है।” अनुराग जैन इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं। केंद्र सरकार में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों और विभागों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। वे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
बुनियादी ढांचा विकास, औद्योगिक नीति, प्रशासनिक सुधार और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में उनके व्यापक अनुभव को नीति आयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति से नीति निर्माण, परियोजना क्रियान्वयन और राज्यों के साथ समन्वय को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। सीईओ के रूप में अनुराग जैन केंद्र सरकार की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और प्रमुख नीतिगत पहलों के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस वर्ष की शुरुआत में मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उनका कार्यकाल दो वर्ष या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा। गौरतलब है कि इसी वर्ष अप्रैल में केंद्र सरकार ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) नियुक्त किया था। उन्होंने सुमन के. बेरी का स्थान लिया था।
नीति आयोग देश की दीर्घकालिक विकास रणनीतियों, आर्थिक सुधारों, राज्यों के साथ सहयोग और विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में अनुराग जैन की नियुक्ति को नीति आयोग के लिए एक अहम प्रशासनिक और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।







