देशनई दिल्ली

राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा पैनल की बैठक में दिया जोर, कहा- ‘आधुनिक युद्ध के लिए आधुनिक सेना जरूरी’

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने साफ कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में सशस्त्र बलों का तेजी से आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार की पहलों, वित्तीय संसाधनों, तकनीक और नए सैन्य ढांचे पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद मौजूद रहे। इनमें तरुण चुघ, संदीप पाठक, पवन खेड़ा, तिरुचि शिवा, सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय और नवीन जिंदल शामिल थे।
बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर दिया यह संदेश
अपनी शुरुआती टिप्पणी में रक्षा मंत्री ने कहा, “आज की बैठक का मुख्य फोकस सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों ने हमारी सुरक्षा प्राथमिकताओं को और महत्वपूर्ण बना दिया है। ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। हमारी सेना को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।”आधुनिकीकरण के तीन मुख्य स्तंभराजनाथ सिंह ने आधुनिकीकरण के तीन अहम स्तंभ बताए:

1. वित्तीय संसाधन
उन्होंने बताया कि हर साल आधुनिकीकरण बजट बढ़ाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें से 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च और उपकरणों की खरीद के लिए आवंटित किए गए हैं।

रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। रक्षा निर्यात 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम था, जो अब लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो चुका है। 2029 तक उत्पादन 3 लाख करोड़ और निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

2. तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी
रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक अब युद्ध का अभिन्न अंग बन चुकी है। डीआरडीओ नई योजनाएं चला रहा है और नए हथियार-मिसाइल सिस्टम का परीक्षण हो रहा है। निजी क्षेत्र को समान अवसर देकर एमएसएमई से लेकर बड़ी कंपनियों तक को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

3. मानव संसाधन और नए सैन्य ढांचे
राजनाथ सिंह ने मानव संसाधन को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाएं अपने संगठनात्मक ढांचे को लगातार सुधार रही हैं। सेना में ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ जैसी नई प्लाटून संरचनाएं आज की युद्ध जरूरतों के हिसाब से बहुत उपयोगी साबित हो रही हैं।

रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया, “आधुनिकीकरण का मतलब सिर्फ नए हथियार खरीदना नहीं है। इसका मतलब है बलों की युद्ध-तैयारी मजबूत करना, उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करना और देश के भीतर ऐसी क्षमताएं विकसित करना जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमताएं बेहद जरूरी हैं।”

लक्ष्य: मजबूत रक्षा इकोसिस्टम

बैठक के समापन पर राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आधुनिक उपकरण हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसा रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना है जिसमें भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़े, तकनीक देश के अंदर विकसित हो और रणनीतिक मामलों में दूसरों पर निर्भरता कम हो।

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