- माउण्ट आबू के ब्रह्माकुमार ओंकार भाई ने सम्बोधित किया…
- वर्क लाईफ बैलेन्स विषय पर रखे विचार…
- बैंक के ग्राहकों के प्रति सेवा, सहयोग और अपनत्व का भाव जरूरी…
नवा रायपुर (विश्व परिवार)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की भगिनी संस्थान राजयोगा एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन के वैज्ञानिक, अभियन्ता एवं आर्किटेक्ट प्रभाग (SEA Wing) द्वारा आयोजित पर्यावरण सरंक्षण व आपदा प्रबन्धन राष्ट्रीय अभियान के अन्तर्गत नवा रायपुर के छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय मुख्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय था- कार्य और व्यक्तिगत जीवन में सन्तुलन (Work- Life Balance)।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता माउण्ट आबू से आए ब्रह्माकुमार ओंकार भाई ने कहा कि बैंक को केवल कार्यस्थल नहीं बल्कि एक परिवार की तरह समझें। यदि हम अपने सहकर्मियों और ग्राहकों के प्रति सेवा, सहयोग और अपनत्व की भावना रखेंगे तो ही कार्यस्थल का वातावरण अधिक सौहार्दपूर्ण, प्रेरणादायी और तनावमुक्त बनेगा।
उन्होंने कहा कि हालात नहीं बल्कि अपने ख्यालात को बदलिए। व्यक्तिगत जीवन और कार्यस्थल में वास्तविक परिवर्तन परिस्थितियाँ बदलने से नहीं बल्कि अपने दृष्टिकोण (Attitude) को सकारात्मक बनाने से आता है। जब हम अपनी सोच और नज़रिए को बदलते हैं तो वही परिस्थितियाँ हमें अवसर के रूप में दिखाई देने लगती हैं।
उन्होंने बतलाया कि स्व प्रबन्धन ही तनाव प्रबन्धन की असली कुंजी है। यदि तनाव से बचना चाहते हैं तो स्वयं के विचारों, भावनाओं और समय का सही प्रबंधन करते हुए नियमित राजयोग मेडिटेशन द्वारा स्वयं को रिचार्ज करना आवश्यक है। जब हमारा मन शांत और स्थिर होता है तब हममें श्रेष्ठ निर्णय लेने की शक्ति आती है।
उन्होंने आगे कहा कि अपने कार्य और व्यक्तिगत जीवन में सन्तुलन का आधार है सकारात्मक सोच, आत्म-प्रबंधन और सेवा-भाव। जब व्यक्ति स्वयं के भीतर संतुलन और प्रसन्नता बनाए रखता है तभी वह अपने कार्य और व्यक्तिगत जीवन दोनों में उत्कृष्टता एवं सामंजस्य स्थापित कर सकता है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा, ब्रह्माकुमारी रूचिका दीदी, ब्रह्माकुमारी रिंकू और ब्रह्माकुमारी जागृति दीदी सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित थे।







