रायपुर (विश्व परिवार)। छ.ग. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी द्वारा आज प्रदेश की जनता के लिए ‘1076’ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा की शुरुआत की गई है। सरकार का यह दावा कि इस हेल्पलाइन के माध्यम से स्वयं मुख्यमंत्री जी सीधे जनता की समस्याओं को सुनेंगे, एक स्वागत योग्य कदम है। परंतु, इस महत्वपूर्ण योजना की आधिकारिक घोषणा में कई ऐसे व्यावहारिक पहलुओं को छोड़ दिया गया है, जो पूर्व में भी जनहित की योजनाओं की विफलता का कारण बनते रहे हैं। ‘नागरिक सरोकार मंच’ इस नई व्यवस्था के सुचारू संचालन को लेकर सरकार के समक्ष कुछ अत्यंत गंभीर और जन-हितैषी प्रश्न उठाता है।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि घोषणा में सबसे बड़ी कमी समय की स्पष्टता का न होना है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा यह जानकारी साझा नहीं की गई है कि माननीय मुख्यमंत्री जी प्रतिदिन अथवा सप्ताह में कितने बजे से कितने बजे तक, या कुल कितने घंटे/मिनट जनता के लिए फोन पर स्वयं उपलब्ध रहेंगे। एक मुख्यमंत्री के पास प्रशासनिक और शासकीय कार्यों की भारी व्यस्तता होती है, ऐसे में 24 घंटे उनका फोन पर उपलब्ध रहना असंभव है। अतः सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आम नागरिक किस समय कॉल करें ताकि उनकी बात सीधे मुख्यमंत्री जी से हो सके, अन्यथा यह हेल्पलाइन भी केवल एक सामान्य कॉल सेंटर बनकर रह जाएगी जहां अधिकारी सिर्फ शिकायत दर्ज करते हैं।
उन्होने कहा कि मंच ने सरकार का ध्यान राज्य की पूर्ववर्ती और वर्तमान ‘जनदर्शन’ व्यवस्था की कमियों की ओर भी आकर्षित किया है। धरातल की सच्चाई यह है कि महीनों-महीनों तक जनदर्शन कार्यक्रम स्थगित या बंद रहते हैं। इसके कारण प्रदेश के सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों से गरीब ग्रामीण अपना पेट काटकर, भारी कर्ज लेकर और किराया लगाकर राजधानी रायपुर पहुंचते हैं, परंतु यहां आने के बाद उन्हें पता चलता है कि जनदर्शन स्थगित है। इस अव्यवस्था के कारण जनता लगातार भटकने को मजबूर है।
धनेन्द्र साहू ने मांग किया है एवं सुझाव दिया है कि मुख्यमंत्री जी की समय-सारणी का निर्धारण करते हुए उपलब्धता का एक निश्चित और पारदर्शी समय (जैसे सप्ताह में एक विशिष्ट दिन या प्रतिदिन एक निश्चित घंटा) सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता में असमंजस की स्थिति न रहे। डिजिटल ट्रैकिंग और टोकन व्यवस्था: हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज होते ही आवेदक को तुरंत एसएमएस (SMS) के माध्यम से ‘टोकन या शिकायत आईडी’ प्राप्त होनी चाहिए, जिससे वे घर बैठे अपनी शिकायत की प्रगति को ट्रैक कर सकें। निवारण की समय-सीमा (SLA): प्रत्येक शिकायत के निराकरण के लिए 7 से 15 दिनों की अधिकतम समय-सीमा तय हो। जब तक संबंधित नागरिक समाधान से पूरी तरह संतुष्ट न हो, तब तक शिकायत को बंद (Close) न किया जाए। भौतिक रूप से होने वाले जनदर्शन कार्यक्रमों का एक एडवांस कैलेंडर ब्लॉक और जिला स्तर पर अखबारों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से जारी किया जाए, ताकि दूर-दूर से आने वाले ग्रामीणों का पैसा और समय बर्बाद होने से बचे। केवल घोषणाएं कर देना या नई हेल्पलाइन का नंबर जारी कर देना ही अंतिम समाधान नहीं है। वर्तमान में मुख्यमंत्री कार्यालय में जाने वाले आवेदनों की स्थिति यह होती है कि उन पर केवल एक औपचारिक ‘पावती’ दे दी जाती है और नागरिक महीनों तक उसके निराकरण के लिए भटकता रहता है। यदि सरकार सचमुच जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर है, तो उसे ‘1076’ को एक जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र में बदलना होगा, न कि इसे सिर्फ एक लोक-लुभावन विज्ञापन बनाकर छोड़ दे







