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युद्ध के बीच भी देश में नहीं आने दिया ऊर्जा संकट: पीएम मोदी

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण से पूरी दुनिया में ग्लोबल एनर्जी संकट है. देशभर अब तक युद्ध ने 21वीं सदी का सबसे बड़े ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।
बड़े-बड़े देश खाद्य संकट झेल नहीं सकते थे, लेकिन समय रहते संकट पर नए भारत ने दूरदर्शिता और योजनाबद्ध प्रयास किए. भारत ने इस स्तर पर सबसे फैसले लिए. संकट का सामना सबसे पहले ओमान के रास्ते से रणनीति बनाई गई। भारत के संसाधनों को सुरक्षित रखना कि प्रधानमंत्री ने हिसार की इंडियन ऑयल रिफाइनरी का टेलीमैटिक पावर कारपोरेशन कंट्रोल रूम जाकर भारत इस संकट से उबर गया. जब सभी देशों के पास तेल नहीं था तब भारत ने बड़े टैंकों, भंडारण और आयात प्रणाली में बदलाव किया, तब किस प्रकार संकट का समाधान हो गया. यह मेहनत, प्रयास और दूरदर्शिता ही दिखाई पड़ती है. पीएम मोदी ने कहा कि देश की जरूरतों को करीब 60 प्रतिशत एलपीजी गारंटी देशों से आयात होता है. खाड़ी जनरेशन वाले देशों में युद्ध शुरू हो गया. अचानक युद्ध जैसे हालात बनने से इसकी सप्लाई थमने बंद हो गई. अब अचानक आपूर्ति के रुकने से स्थिति और खराब पड़ सकती थी. इस स्थिति को देखते हुए हमने रिफाइनरी कंपनियों से दूसरी रणनीति बनाने को कहा. पिछले 90 दिनों के भीतर रिफाइनरी ने एलपीजी उत्पादन में 54 हजार मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की. पीएम मोदी ने कहा कि एलपीजी के लिए विशेष अभियान चलाया गया।
युद्ध के समय में भारत ने 11 लाख से अधिक एलपीजी गैस सिलेंडरों का उत्पादन बढ़ाया. इसके साथ ही 90 दिनों के भीतर एलपीजी उत्पादन में 54 हजार मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की गई. अब हमने एलपीजी कनेक्शन 950 रुपये से कम कीमत पर उपलब्ध कराना जारी रखा है. वहीं, गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत 650 रुपये में भी गैस मुहैया कराई जा रही है. युद्ध के कारण डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो गया था. हालात इतने बने कि देश के तेल केंद्रों (ऑयल) की करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. पीएम मोदी ने कहा कि हमने आयात के रास्ते भी बंद नहीं होने दिए. दुनिया के कई देशों में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई थी। कई देशों में तो डीजल-पेट्रोल कोटे के आधार पर मिलने लगा था।
लेकिन भारत में एक भी दिन ऐसा हालात नहीं आया. उस समय कई स्तर पर आपूर्तियां भी प्रभावित हुईं. अकेले डीजल और पेट्रोल पर देश को करीब 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा. इस घाटे को भरपाई की जिम्मेदारी सरकार ने समय रहते अच्छे प्रबंधन के माध्यम से डीजल और पेट्रोल पर प्रति लीटर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी भी कम की. भारत को युद्ध जैसी स्थिति से बाहर निकालने में इस कठिन समय में बेहतर काम आया. पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के समय भारत 25-26 देशों को डीजल आयात कर रहा था. युद्ध के दौरान भारत ने ईंधन आयात करने वाले देशों की संख्या बढ़ाकर 40-50 कर दी. पीएम ने यह स्पष्ट किया कि रिफाइनरियां देश के साथ सरकार के और देश के नागरिक साझेदार हैं।

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