बिलासपुर (विश्व परिवार)। हाईकोर्ट में नवनामांकित अधिवक्ताओं को मानदेय देने के मुद्दे पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने एकमुश्त 20 हजार रुपए अनुदान देने की प्रस्तावित योजना पर राज्य सरकार से निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने की अपेक्षा जताई है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा, न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत शपथपत्र में बताया गया कि 2 मार्च 2026 की बैठक के एजेंडा आइटम क्रमांक-6 के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल में नए पंजीकृत अधिवक्ताओं को उनकी प्रारंभिक आवश्यकताओं-जैसे कानून की पुस्तकें (लाइब्रेरी), टेबल और कुर्सी खरीदने के लिए एकमुश्त 20 हजार अनुदान देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया था।
शासन ने बताया कि वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के समक्ष रखने की सलाह दी है। इसके पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में लागू समान योजनाओं एवं नियमों संबंधित राज्यों की जानकारी मांगी गई है। जानकारी प्राप्त होने के बाद प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार आवश्यक जानकारी शीघ्र प्राप्त करने तथा प्रस्ताव को बिना अनावश्यक विलंब के कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी, ताकि इस पर जल्द उचित निर्णय लिया जा सके। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित करते हुए प्रकरण को संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।







