देशनई दिल्ली

भारत-ब्रिटेन नौसेनाओं की बैठक, समुद्री सहयोग और उभरती तकनीकों पर चर्चा

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं ने समुद्री सहयोग को मजबूत करने और परिचालन स्तर पर साझेदारी बढ़ाने के लिए नई दिल्ली में 14 और 15 अक्टूबर को 17वीं कार्यकारी संचालन समूह की बैठक की। भारतीय नौसेना के अनुसार, बैठक में दोनों देशों ने व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने के साथ उभरती तकनीकों, भविष्य की रणनीतियों और सैन्य क्षमताओं में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की।
भारतीय नौसेना की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर दी गई जानकारी के मुताबिक, बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय नौसेना के रियर एडमिरल सचिन सिकेरा और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के रणनीति एवं नीति निदेशक मेजर जनरल पॉल मेनार्ड ने की। बैठक में दोनों नौसेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया।
इस बीच, भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल 11 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंचा था। वहां वह रॉयल नेवी के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ‘कोंकण-26’ में हिस्सा ले रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें समुद्री चरण और बंदरगाह चरण शामिल हैं।
बंदरगाह चरण के दौरान ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त पी. कुमारन ने प्लायमाउथ में आईएनएस त्रिशूल का दौरा किया और जहाज के चालक दल से बातचीत की। इस अवसर पर उन्होंने एक औपचारिक डेक स्वागत समारोह भी आयोजित किया, जिसमें ब्रिटेन के रक्षा तत्परता एवं उद्योग राज्य मंत्री ल्यूक पोलार्ड शामिल हुए। समारोह में प्लायमाउथ और डेवोनपोर्ट के सांसदों, प्लायमाउथ के लॉर्ड मेयर, रॉयल नेवी के वरिष्ठ अधिकारियों, भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, थिंक टैंक और रक्षा उद्योग से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, पी. कुमारन ने अपने संबोधन में कहा कि लगातार नौसैनिक संपर्क से दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल, आपसी समझ और भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में मदद मिलती है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ‘कोंकण’ अभ्यास पिछले दो दशकों में आकार और जटिलता के लिहाज से काफी विकसित हुआ है। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री अभियानों में बेहतर तालमेल और आपसी समझ को बढ़ावा मिला है। मंत्रालय के मुताबिक, यह वार्षिक द्विपक्षीय अभ्यास दोनों देशों की मजबूत समुद्री साझेदारी और समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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