रायपुर (विश्व परिवार)। हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर में शुक्रवार को तीन दिवसीय इंटरनेशनल ट्रेड लॉ समिट (ITLS) 2026 का शुभारंभ हुआ। समिट का विषय “द WTO@30: रीइमैजिनिंग मल्टीलैटरलिज्म इन इंटरनेशनल ट्रेड लॉ” रखा गया है। इसमें अकादमिक जगत, नीति-निर्माता, कानूनी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून एवं वैश्विक व्यापार व्यवस्था के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं।
समिट का आयोजन एचएनएलयू के स्कूल फॉर लॉ एंड टेक्नोलॉजी और सेंटर फॉर WTO एंड WIPO स्टडीज द्वारा अकादमिक एवं संस्थागत सहयोगियों के साथ मिलकर किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन दिया। छत्तीसगढ़ शासन के डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड एविएशन प्रभात मलिक, IAS मुख्य अतिथि तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड, नई दिल्ली के प्रो. (डॉ.) जेम्स जे. नेडुमपारा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
बदलते वैश्विक परिवेश में व्यापार की भूमिका
कुलपति प्रो. विवेकानंदन ने कहा कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी बदलाव, सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं और संस्थागत विश्वास में कमी के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार की भूमिका पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि व्यापार केवल वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सहयोग को बढ़ावा देने और टकराव को नियंत्रित करने का माध्यम भी बन सकता है।
उन्होंने कहा कि WTO की स्थापना के 30 वर्ष पूरे होने के दौरान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। डिजिटल ट्रेड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरणीय उपायों और ग्लोबल वैल्यू चेन्स जैसे नए विषयों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।
व्यापार को मानवाधिकार और पर्यावरण से अलग नहीं देखा जा सकता
प्रो. जेम्स जे. नेडुमपारा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को व्यापक सामाजिक और आर्थिक सरोकारों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण, स्थिरता और श्रम परिस्थितियां भी व्यापार व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने बदलती चुनौतियों के अनुरूप WTO के नियमों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था और WTO के न्यायिक कार्य को बनाए रखने की जरूरत बताई।
छत्तीसगढ़ के नजरिए से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को देखने पर जोर
मुख्य अतिथि प्रभात मलिक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का प्रभाव राज्यों, उद्योगों, कारोबार और नागरिकों तक पहुंचता है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को छत्तीसगढ़ के दृष्टिकोण से देखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राज्य की स्थानीय इंडस्ट्री और समुदाय बहुपक्षीय आर्थिक व्यवस्था से किस तरह जुड़ सकते हैं और उसका लाभ उठा सकते हैं, इस पर भी अध्ययन किया जाना चाहिए।
विभिन्न देशों के WTO चेयर्स ने की चर्चा
समिट के उद्घाटन दिवस पर “द फ्यूचर ऑफ मल्टीलैटरलिज्म: हाउ अकैडेमिया कैन शेप द नेक्स्ट एरा ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड लॉ” विषय पर अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें चिली, इंडोनेशिया, वियतनाम, मॉरीशस, पेरू और भारत के WTO चेयर्स ने भाग लिया।
पैनल चर्चा में WTO की उपलब्धियों, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के सामने मौजूद भू-राजनीतिक चुनौतियों और WTO को मजबूत करने में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति तैयार करने में अकादमिक जगत की भूमिका, एविडेंस-बेस्ड रिसर्च, डिजिटल ट्रेड कानून और शोधकर्ताओं व नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
समिट के दौरान व्यापार, विकास, स्थिरता, तकनीक, डिजिटल ट्रेड, गवर्नेंस और डिस्प्यूट सेटलमेंट जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। उद्घाटन कार्यक्रम में डॉ. दीपक श्रीवास्तव, डॉ. अंकित अवस्थी, डॉ. मयंक श्रीवास्तव सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधकर्ता और विद्यार्थी मौजूद रहे।
तीन दिवसीय इंटरनेशनल ट्रेड लॉ समिट 2026 का आयोजन 3 और 4 अक्टूबर को भी जारी रहेगा। इन सत्रों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के भविष्य से जुड़े अकादमिक एवं नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होगी।







