कोटा (विश्व परिवार) प्राचीन जैन तीर्थों, मंदिरों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण हेतु समर्पित श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा, हाड़ौती संभाग के तत्वावधान में 27 अप्रैल को जैन धरोहर दिवस विज्ञान नगर स्थित जैन मंदिर में श्रद्धा और समर्पण व जागरूकता के वातावरण में भव्यता के साथ आयोजित किया गया। सकल दिगंबर जैन समाज समिति के कई वर्षों तक अध्यक्ष पद पर अपनी निस्वार्थ भाव से सेवाएं देने वाले वर्तमान समय में संरक्षक राजमल पाटौदी ने विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्रe उल्लखनीय योगदान देने वाले राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार को जानकारी देते हुवे बताया कि प्रात 9 बजे मंगलाचरण से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में मंदिर एवं मूर्ति संरक्षण हेतु राजकुमार चांदवाड़, ईश्वर सोनी एवं निखलेश सेठी द्वारा आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया। सफल संचालन पी के हरसोरा ने किया।
स्वागत भाषण में पुरातत्व संयोजक जे.के. जैन ने बताया कि महासभा विगत 125 वर्षों से निरंतर इस दिशा में कार्यरत है। उन्होंने देवली क्षेत्र में जिन बिम्बों के संरक्षण हेतु महासभा एवं समाज के संयुक्त प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष देशभर में 600 स्थानों पर जैन धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। साथ ही पूर्व अध्यक्ष निर्मल कुमार सेठी को विनम्र विन्यांजलि अर्पित की गई। परम संरक्षक विमल जैन नांता ने समाज की एकजुटता पर बल देते हुए मंदिरों एवं मूर्तियों के संरक्षण में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। सकल दिगम्बर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला ने कहा कि ‘जैन मंदिरों की सुरक्षा ही समाज की सुरक्षा है,’ और इसे पवित्र दायित्व बताया। निखलेश सेठी ने सुझाव दिया कि 18 मई, अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर कोटा संग्रहालय में संरक्षित प्राचीन मूर्तियों को समाज के समक्ष प्रदर्शित कर उनकी जानकारी दी जानी चाहिए।
मुख्य वक्ता आर.के. जैन ने बिलासगढ़, अटरू एवं शेरगढ़ क्षेत्रों में स्थित हजारों वर्ष प्राचीन मूर्तियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में इन्हें पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लिया गया है। महासभा के अध्यक्ष नरेश पांड्य एवं महामंत्री राकेश चपलमन ने जानकारी दी कि कार्यक्रम में श्री आदिनाथ जैन मंदिर, बालिता द्वारा शेरगढ़ से प्राप्त अतिप्राचीन मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजित करने पर सम्मान किया गया। साथ ही श्री पंचायत बघेरवाल महावीरजी नेमीश्वर, टिपटा गढ़ पैलेस को प्राचीनता के बावजूद नियमित पूजन-अर्चन बनाए रखने हेतु सम्मानित किया गया। सकल दिगंबर जैन समाज के कई वर्षों तक अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं देने वाले वर्तमान में संरक्षक राजमल पाटौदी ने अपने संबोधन में कहा कि महासभा की यह शाखा लंबे समय से प्राचीन जैन तीर्थों, मंदिरों, मूर्तियों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, सर्वेक्षण, जीर्णोद्धार एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभा रही है, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस समृद्ध धार्मिक विरासत से लाभान्वित हो सकें। पारस जैन “पार्श्वमणि” ने बताया कि
इस अवसर पर चित्र अनावरण का सौभाग्य श्रवण कुमार बड़जात्या को तथा दीप प्रज्वलन संजय पांड्या द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संरक्षक राजमल पाटौदी, पुरातत्व संयोजक जे.के. जैन, महासभा अध्यक्ष नरेश पांड्य, महामंत्री राकेश चपलमन, कार्याध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, कोषाध्यक्ष जीवंधर सोगानी, मनोज जैसवाल, सुरेश हरसोरा, तारा चंद बडला, जिनेंद्र जैन (जज साहब), पंकज सेठी, अशोक पहाड़िया सहित सकल दिगम्बर जैन समाज के मान्य सदस्य उपस्थित थे।







