देशनई दिल्ली

जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा में भारतीय समुदाय से की मुलाकात, गुयाना के साथ 50 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा समेत कई समझौतों पर बनी सहमति

(विश्व परिवार)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को एंटीगुआ और बारबुडा के गवर्नर जनरल सर रॉडनी विलियम्स से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी बातचीत की और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान की सराहना की।

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि एंटीगुआ और बारबुडा में भारतीय समुदाय से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग के संबंधों को मजबूत बनाने में समुदाय की भूमिका की सराहना की।

जयशंकर इन दिनों एंटीगुआ और बारबुडा की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने सेंट जॉन्स में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) 2026 से इतर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से भी मुलाकात की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के संदर्भ में आर्थिक सहयोग बढ़ाने और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा हुई।

उन्होंने गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली से भी मुलाकात की। इस दौरान गुयाना में सड़क, स्वास्थ्य और रक्षा परियोजनाओं के लिए 50 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा बढ़ाने की घोषणा की गई। दोनों देशों ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की विनिर्माण परियोजनाओं, त्वरित प्रभाव वाली विकास परियोजनाओं और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। गुयाना में UPI जैसी भुगतान प्रणाली विकसित करने पर भी सहमति बनी।

जयशंकर ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों और कारोबारी नेताओं की बैठक में भी हिस्सा लिया। उन्होंने सदस्य देशों से आर्थिक जोखिम कम करने, व्यापारिक साझेदारियों में विविधता लाने और संपर्क गलियारों का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने स्थानीय वितरण व्यवस्था मजबूत करने तथा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

विदेश मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में फैला भारतीय कारोबारी समुदाय राष्ट्रमंडल के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। उन्होंने जलवायु कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन का उपयोग करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। साथ ही भारत के आपदा के समय त्वरित सहायता और मानवीय राहत अभियानों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए स्थानीय सहायता केंद्र विकसित करने की जरूरत बताई।

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