नई दिल्ली (विश्व परिवार)। BRICS Summit 2026: भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल हुई है। समूह के सभी सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पत्र (New Delhi Declaration) पर सर्वसम्मति से सहमति जताई है। खास बात यह है कि घोषणा में किसी देश का नाम लिए बिना सभी प्रकार की आक्रामकता की निंदा की गई है। वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और बढ़ते मतभेदों के बीच इसे भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
PM मोदी ने कहा- BRICS किसी के खिलाफ नहीं
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता लोगों को केंद्र में रखने और मानवता को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण से प्रेरित है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए BRICS के सामने एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने BRICS Community Continuity and Implementation Mechanism तथा नाविकों की सुरक्षा समेत कई प्रस्ताव भी सामने रखे।
संयुक्त घोषणा पर सहमति क्यों थी चुनौती?
BRICS शेरपाओं ने शिखर सम्मेलन से पहले कई दिनों तक सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने के लिए गहन बातचीत की। दरअसल, ईरान और UAE के बीच तनाव के चलते घोषणा पत्र की भाषा को लेकर मतभेद सामने आए थे।
मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भी संयुक्त घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी थी। ऐसे में इस बार आम सहमति बनना भारत के लिए अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
ईरान और UAE के बीच क्या था विवाद?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान चाहता था कि BRICS अमेरिकी-इजरायली हमलों और पश्चिमी प्रतिबंधों की स्पष्ट निंदा करे। वहीं UAE की मांग थी कि खाड़ी क्षेत्र और उसकी सुविधाओं पर हुए ईरानी मिसाइल एवं ड्रोन हमलों का भी उल्लेख किया जाए।
भारत ने रूस, ब्राजील और मिस्र के साथ मिलकर दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत की। अंततः ऐसी भाषा पर सहमति बनी, जिसे सभी सदस्य देश स्वीकार कर सकें।







