देशनई दिल्ली

मोबाइल फोन बना गुड गवर्नेंस का टूल, 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे: पीएम मोदी

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए टेलीकॉम सेक्टर, डिजिटल इंडिया और मोबाइल फोन की बदलती भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बीते 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन सिर्फ आधुनिक संचार का माध्यम नहीं रहा, बल्कि गुड गवर्नेंस का अहम टूल बनकर उभरा है और डिजिटल इंडिया विजन के केंद्र में रहा है।
टेलीकॉम सुधारों से आम नागरिक तक पहुंची सुविधा
पीएम मोदी ने बताया कि टेलीकॉम सेक्टर में जरूरी सुधार किए गए, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हुआ और मोबाइल फोन व अन्य हार्डवेयर को भारत में बनाने पर फोकस किया गया। इन प्रयासों से मोबाइल फोन और डेटा तक आम नागरिक की पहुंच आसान हुई, जिससे लोगों की ‘ईज ऑफ लिविंग’ बढ़ी है। एक दशक पहले भारत में डिजिटल डिवाइड बड़ी चुनौती थी और आधुनिक तकनीक विशेषाधिकार बनती जा रही थी। डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए इस स्थिति को बदला गया और मोबाइल फोन को केंद्र में रखकर तकनीक का लोकतंत्रीकरण किया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाएं बिना बाधा चलती रहीं
मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं को बिना बाधा चालू रखा। आज दूर-सुदूर गांवों के गरीब बच्चे भी क्वालिटी नॉलेज एक्सेस कर पा रहे हैं और डिजिटल लर्निंग सबकी पहुंच में आ गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन अब सिर्फ बात करने या चैट करने का जरिया नहीं रहा। इसने लोगों का आना-जाना कम किया, लंबा इंतजार खत्म किया, खर्च घटाया और सुविधाएं बढ़ाईं। यही तकनीक का सबसे बड़ा फायदा है जो सीधे आम लोगों को मिल रहा है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से 5 लाख करोड़ रुपये लीकेज रोका
पीएम मोदी ने कहा, “डिजिटल गवर्नेंस ने हालात बदल दिए हैं। आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध हैं। सरकारी मदद अब सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए लगभग 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे हैं। अगर पुरानी व्यवस्था होती तो सरकार का इतना बड़ा लीकेज हो जाता।”
टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से नए सेक्टर बने
बीते दशक में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का निरंतर विस्तार हुआ। रिमोट एरियाज में टावर्स लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर का अभूतपूर्व विस्तार हुआ और डेटा सस्ता हुआ। इससे अर्थव्यवस्था के नए सेक्टर बने, टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन में नए कंज्यूमर्स बढ़े और नए क्रिएटर्स की जनरेशन तैयार हुई।
गेमिंग सेक्टर का उदाहरण
पीएम ने गेमिंग सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत में 50 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी तरह से गेमिंग से जुड़े हैं। इसमें बड़ी संख्या युवाओं की है। टियर-2 और टियर-3 शहरों का युवा भी ई-स्पोर्ट्स में प्रतियोगिता कर रहा है, कंटेंट बना रहा है और नए बिजनेस खड़े कर रहा है। मोबाइल फोन अब गेमिंग कंसोल और क्रिएशन का स्टूडियो भी बन गया है।
सुरक्षा फ्रेमवर्क पर जोर, कंज्यूमर से क्रिएटर की यात्रा
प्रधानमंत्री ने कहा कि टेलीकॉम और डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व के साथ सुरक्षा फ्रेमवर्क को चाक-चौबंद करना जरूरी है। फोन और नेटवर्क की सुरक्षा प्राथमिकता है। डीपफेक जैसी चुनौतियों के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा बीते वर्षों में भारत ने कंज्यूमर से क्रिएटर बनने की यात्रा तय की है। अब भारत, उस लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है, जहां प्रोडक्ट, डिजाइन भी भारत में होगा, उसकी टेक्नोलॉजी और आईपी भी भारत की होगी।

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