लखनऊ (विश्व परिवार)। लखनऊ के बैकुंठधाम में प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार किया गया। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी। अखिलेश ने भाई की चिता पर लकड़ी रखी और अंतिम बार प्रणाम किया। दोनों बेटियां ने भी पिता की चिता पर लकड़ी रखी। इस दौरान पूरा यादव परिवार मौजूद है। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में समर्थक मौजूद रहे। ‘प्रतीक यादव अमर रहे’ के नारे लगा रहे हैं। वहीं शिवपाल यादव के बेटे आदित्य ने शव को कंधा दिया।
अंतिम यात्रा में कई राजनीतिक दिग्गज हुए शामिल
प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार में कई राजनीतिक दिग्गज शामिल हुए। नम आंखों के साथ शिवपाल यादव के साथ अखिलेश यादव बैठे दिखे। इसके साथ ही पूरा सैफई परिवार एक साथ नजर आया। इस मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी नजर आए।
इससे पहले प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को सुबह अंतिम दर्शन के लिए घर में रखा गया था। जहां प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, मंत्री बेबी रानी मौर्य और स्वामी अवधेशानंद गिरि ने प्रतीक को श्रद्धांजलि (Prateek Yadav’s Last Rites) दी। प्रतीक के चाचा शिवपाल यादव ने भी अपने पूरे परिवार के साथ अंतिम दर्शन किए है। इस दौरान प्रतीक की भाभी डिंपल यादव काफी भावुक नजर आई।
38 की उम्र में प्रतीक यादव का हुआ था निधन
बता दें कि बुधवार सुबह 6 बजे 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हुआ था। पीएम रिपोर्ट के मुताबिक प्रतीक यादव की मृत्यु का मुख्य कारण पल्मोनरी एम्बोलिज्म (Pulmonary Embolism) रहा। यानी उनके फेफड़ों की धमनियों (रक्त वाहिका) में खून का एक बड़ा थक्का (Blood Clot) फंस गया था। इस स्थिति के कारण फेफड़ों तक होने वाला खून और ऑक्सीजन का प्रवाह अचानक पूरी तरह बाधित हो गया। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को बेहद गंभीर माना जाता है, जिसमें मरीज को संभलने का मौका मिलना बहुत मुश्किल होता है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऑक्सीजन और रक्त की सप्लाई अचानक रुकने से उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई। रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण दिल के दाहिने हिस्से पर अत्यधिक दबाव (Pressure) बढ़ गया था। बड़ा ब्लड क्लॉट बनने की वजह से उनकी सांसें अचानक थम गईं, जो अंततः उनकी मृत्यु का कारण बना।







