रायपुर (विश्व परिवार)। रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा ने पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल में मिली जीत पितृऋण से मुक्ति है। उन्होंने मुखर्जी जी की शहादत को याद करते हुए कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद उनकी कर्मभूमि बंगाल में विधानसभा चुनाव जीतना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने सरीखा है।
विधायक पुरंदर मिश्रा आज यहां क्रमशः शारदा चौक व पार्टी कार्यालय एकात्म परिसर में आयोजित कार्यक्रमों में बोल रहे थे। वे सर्वप्रथम शारदा चौक में स्थापित पंडित मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने एकात्म परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी पंडित मुखर्जी को अपनी आदरांजलि अर्पित की। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सनातन धर्म मानने वाले व्यक्ति के जीवन में आने वाले ऋणों का उल्लेख किया।
विधायक मिश्रा ने देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण का उदाहरण देते हुए कहा कि हम सभी पर मुखर्जी जी का पितृऋण था। वर्षों के संघर्ष के बाद इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली जीत से इस कर्ज से मुक्ति मिली है। सभा को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
इधर, विधायक पुरंदर मिश्रा ने पंडित मुखर्जी की मौत को अस्वाभाविक बताया है। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराने के पीछे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार बताया है। उल्लेखनीय है कि पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु 23 जून 1953 को कश्मीर की जेल में रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई थी। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे।
मुखर्जी की मां की पुकार क्यों नहीं सुनी नेहरू ने?
विधायक पुरंदर मिश्रा ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी बिना परमिट के 1953 में कश्मीर यात्रा पर गए थे। उस समय कश्मीर में शेख अब्दुल्ला की सरकार हुआ करती थी। उसी सरकार ने डॉ. मुखर्जी को गिरफ्तार कर श्रीनगर की जेल में नजरबंद कर दिया था। उस समय जेल में रहने के दौरान तबीयत खराब होने पर भी डॉ. मुखर्जी को समुचित उपचार नहीं मिल पाया था।
विधायक मिश्रा ने इतिहास को याद करते हुए कहा कि 22 जून को डॉ. मुखर्जी के सीने में तेज दर्द हुआ था। दोपहर में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और अगले ही दिन 23 जून 1953 को तड़के 3:40 बजे उनके निधन की खबर आ गई।
डॉ. मुखर्जी की मां योगमाया देवी को याद करते हुए विधायक मिश्रा ने कहा कि उन्होंने अपने सुपुत्र की मौत को अस्वाभाविक बताया था। साथ ही इसकी निष्पक्ष जांच के लिए एक आयोग के गठन की मांग भी की थी। उस समय देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। विधायक मिश्रा ने सवाल उठाया कि डॉ. मुखर्जी की मां योगमाया देवी द्वारा आयोग गठन की मांग को नेहरू ने क्यों अनसुना किया।







