नई दिल्ली (विश्व परिवार)। मनुस्मृति (Manusmriti) विवादित देकर कांग्रेस सासंद राहुल गांधी विपक्ष के साथ-साथ हिंदू धर्मचार्यों के निशाने पर आ गए हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी को चेतावनी दी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी पर भड़कते हुए कहा कि हिंदू धर्मविरोधी बयानों (Anti-Hindu statement) से बाज आएं, नहीं तो कड़ा विरोध होगा।
राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है। शंकराचार्य ने चेतावनी दी है कि धर्मविरोधी बयानबाजी नहीं करें।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से काटकर पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं, बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है। उन्होंने कहा कि संरक्षण और दायित्व का विधानः जिस श्लोक पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने… को राहुल गांधी ने अनुचित रूप से उधृत किया, वह स्त्री की परतन्त्रता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उसकी सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण के दायित्व का विधान है। संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से यहाँ ‘रक्षति’ (रक्षा करना) मूल धातु के अर्थ में सुरक्षा का विधान नन्दः करती है, न कि किसी प्रकार के नियंत्रण ‘नियन्त्रयति’ की।
भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित नहीं, बल्कि ‘शक्ति’ और महानिर्मात्री माना गया
शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परम्परा में नारी का स्थानः भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित नहीं, बल्कि ‘शक्ति’ और महानिर्मात्री माना गया है। ऋग्वेद की मन्त्रद्रष्टा ऋषिकाओं गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा से लेकर यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः का उद्घोष करने वाली यह संस्कृति अधिकार-केन्द्रित संघर्ष के स्थान पर परस्पर पूरकता और सर्वोच्च आदर पर आधारित है।
राहुल गांधी की मानसीकता सनातन विरोधी
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह राजनीतिक भ्रम भी व्याप्त है कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है। जबकि यह पूर्णतः निराधार और सत्य से परे है। स्वतंत्र भारत का शासन और किसी भी राजनीतिक व्यवस्था का संचालन केवल भारत के संविधान से होता है। अपने राजनीतिक नैरेटिव को गढ़ने के लिए किसी दल को जबरन मनुस्मृति से जोड़ना राहुल गाँधी का एक और मनगढ़ंत असत्य है। राहुल गांधी के लगातार मनुस्मृति विरोधी बयानों से यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि उनकी मानसिकता मूलतः हिन्दू धर्मशास्त्रों और सनातन जीवन-दृष्टि के विरोध की है।
राहुल गांधी ने क्या कहा था
बता दें कि महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है। आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है। BJP-RSS के लोग चाहते हैं कि लड़कियां/महिलाएं पिंजरे में बंद रहें, लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते।







