रायपुर (विश्व परिवार)। एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात त्वचा रोग इच्थियोसिस हाइस्ट्रीक्स से पीड़ित 14 वर्षीय बच्ची की
एम्स रायपुर में किए गए व्यापक और बहु-विषयक उपचार के बाद स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बच्ची को त्वचा रोग विभाग में शरीर के बड़े हिस्से पर त्वचा की गंभीर समस्या और मोटी, नुकीली तथा कांटेदार त्वचा
की परतों के साथ लाया गया था। यह एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें त्वचा पर कांटेदार और मोटी परतें दिखाई देती हैं।
बच्ची के परिवार में इस तरह की बीमारी का कोई पूर्व इतिहास नहीं मिला, जिससे यह मामला स्वतः उत्पन्न होने वाला
(sporadic) माना जा रहा है।
बच्ची की स्थिति को देखते हुए एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग के नेतृत्व में एक बहु-विषयक टीम ने उसका उपचार शुरू
किया। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ, जेनेटिक विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर (MSSO) तथा
अन्य संबंधित विशेषज्ञ शामिल रहे। उपचार के दौरान आवश्यक बाहरी दवाएं (टॉपिकल उपचार), पोषण संबंधी सहायता और नियमित चिकित्सकीय निगरानी की गई। बीमारी की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने के लिए त्वचा की बायोप्सी और जेनेटिक जांच की भी योजना बनाई गई।
लगातार उपचार और नियमित निगरानी के बाद बच्ची की त्वचा की स्थिति में स्पष्ट और उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
त्वचा पर दिखाई देने वाली गंभीर परतों में कमी आई है, जिससे बच्ची और उसके परिवार को काफी राहत मिली है। यह
सुधार दुर्लभ त्वचा रोगों में समय पर विशेषज्ञ उपचार और समन्वित चिकित्सा देखभाल के महत्व को दर्शाता है।
वर्तमान में बच्ची की स्थिति स्थिर है। जांच में पोषण की कमी एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आई थी, जिसके लिए
पोषण विशेषज्ञों की टीम आवश्यक सहायता प्रदान कर रही है। त्वचा रोग एवं बाल रोग विशेषज्ञ बच्ची की नियमित निगरानी कर रहे हैं। साथ ही, MSSO टीम परिवार को परामर्श देने, आगे की चिकित्सा देखभाल और नियमित फॉलो-
अप में सहयोग कर रही है।
इस दुर्लभ मामले के उपचार में डॉ. सत्यकी गांगुली, विभागाध्यक्ष, त्वचा रोग विभाग, तथा डॉ. नम्रता छाबड़ा, के साथ
बहु-विषयक टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक जिंदल, कार्यपालक निदेशक, एम्स रायपुर, ने उपचार में शामिल पूरी टीम के
प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए केवल बीमारी का इलाज पर्याप्त नहीं है,
बल्कि मरीज और उसके परिवार की चिकित्सा, पोषण, मानसिक एवं सामाजिक आवश्यकताओं पर भी ध्यान देना
आवश्यक है।
यह मामला दुर्लभ और जटिल बीमारियों के उपचार में एम्स रायपुर की विशेषज्ञता, बहु-विषयक समन्वय और मरीज-
केंद्रित चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाता है। इससे छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों को अपने क्षेत्र में ही विशेषज्ञ
उपचार उपलब्ध कराने के संस्थान के प्रयासों को भी बल मिलता है।
बच्ची के उपचार से पहले और उपचार के बाद की चिकित्सकीय तस्वीरें रिपोर्ट के साथ उपलब्ध हैं। इन तस्वीरों के उपयोग
के लिए त्वचा रोग विभाग द्वारा आवश्यक सहमति प्राप्त की गई है।







