देशनई दिल्ली

चीन के साथ संबंध सामान्य बनाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिरता जरूरी : विदेश मंत्री जयशंकर

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य बनाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति का स्थिर रहना जरूरी है और सीमा पर किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा।
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार को भी सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने से जोड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘हम चीन से यही कहते हैं कि यदि आप सामान्य संबंध चाहते हैं और अन्य क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो यह जाहिर सी बात है कि सीमा पर स्थिति स्थिर रहनी चाहिए और हमें सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की आवश्यकता है।’’
विदेश मंत्री ने मंगलवार शाम ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में कहा कि 2024 के बाद से एलएसी पर स्थिति काफी हद तक सामान्य हुई है और ‘‘उसी के अनुरूप दोनों देशों के संबंध भी सामान्य होने की दिशा’’ में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने आपसी संबंध सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं। पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से अधिक समय तक बने रहे सैन्य गतिरोध के कारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया था। यह गतिरोध 2024 के अंत में समाप्त हुआ था।
यह पूछे जाने पर कि सीमा विवाद से जुड़े कुछ मुद्दों पर शुरुआती समझौता (अर्ली हार्वेस्ट) होने की स्थिति में क्या भारत अधिक चीनी निवेश की अनुमति देगा, जयशंकर ने कहा कि विभिन्न संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इन संभावनाओं पर फिलहाल विचार कर रहे हैं और देखना होगा कि बात कहां तक आगे बढ़ती है लेकिन हम इस बात पर जोर नहीं दे रहे कि व्यापार करने के लिए पहले सीमा विवाद का समाधान करना जरूरी है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘हमारी अपेक्षा इतनी बड़ी नहीं है। हम केवल इतना चाहते हैं कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे। सीमा विवाद के कुछ मुद्दों पर शुरुआती समझौते को मैं इस विवाद के समाधान के अलावा किसी अन्य मुद्दे से नहीं जोड़ूंगा। व्यापार और बाजार तक पहुंच से जुड़ी नीतियों के बारे में अलग से फैसला किया जाएगा।’’
विदेश मंत्री ने चीन के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर चिंताएं भी जताईं। उन्होंने कहा, ‘‘चीन के साथ हमारे सामने कई बड़ी आर्थिक समस्याएं भी हैं। यदि आज आप दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को देखें, तो यह पूरी तरह (चीन के पक्ष में) झुका हुआ है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘यह असंतुलन बहुत अधिक है। कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हमने दुनिया के अन्य देशों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन चीन के बाजार में हमें प्रवेश नहीं मिला है और हम वहां उन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कारोबार भी नहीं कर पाए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हमने चीन को अपने यहां कारोबार के लिए जितने समान अवसर दिए हैं, उतने अवसर हमें चीन में नहीं मिल रहे हैं।’’
जयशंकर ने 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों का भी जिक्र किया और बताया कि इनके कारण दोनों देशों के संबंधों में किस तरह गंभीर तनाव पैदा हो गया था। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘1975 से 2020 तक, यानी पूरे 45 साल तक उस सीमा पर खून नहीं बहा। इससे पहले आखिरी बार 1975 में सीमा पर लोगों की जान गई थी। इस दौरान भारत और चीन के संबंध आगे बढ़े थे।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘इसके बाद 2020 में जब कोविड महामारी के कारण लॉकडाउन लागू था, तब सीमा पर एक के बाद एक कई विवाद हुए और स्थिति ऐसी झड़प तक पहुंच गई, जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक मारे गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए यह 1975 से बरकरार स्थिति में एक बहुत बड़ा बदलाव था। यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा।’’
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि इसके बाद के कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों पर इसका असर साफ दिखाई दिया और सीमा पर शांति एवं स्थिरता बहाल होने तक यह स्थिति बनी रही।

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