नई दिल्ली (विश्व परिवार)। नीट मामले में सुप्रीम कोर्ट पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एजेंसी ने पिछली घटनाओं से सबक नहीं लिया। मामला कोर्ट ने केंद्र, एनटीए और सीबीआई से जवाब मांगा है और स्पष्ट रूप से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। जस्टिस ए.एस. ओका, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए निर्देश और सिफारिशों पर अब तक उठाए गए कदमों का विस्तृत हलफनामा एक सप्ताह के भीतर पेश किया जाए। अदालत ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जिसके बाद एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई और उसकी सिफारिशों को स्वीकार भी किया गया था।
यह मामला परीक्षा और आले इंडिया मेडिकल एसोसिएशन को लेकर एनएमसी से संबंधित याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि नीट जैसी बड़ी परीक्षा कराने के लिए मौजूदा प्रणाली में गंभीर एवं बुनियादी सुधारों की जरूरत है। याचिका में बार-बार पेपर लीक को लेकर 22.7 लाख से अधिक छात्रों के अधिकारों पर सीधा सवाल है। याचिका में यह भी मांग की गई कि इस वर्ष जांच के दौरान कोर्ट की निगरानी में एक हाई-पावर मॉनिटरिंग समिति गठित की जाए। इसमें एक सुप्रीम कोर्ट जज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और परीक्षा प्रक्रिया से शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा इस साल बनाई गई नई प्रणाली की भी समीक्षा करने को कहा। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के सुधार के लिए पूर्व में बनी समिति की सुझावों को लागू नहीं किया गया। समिति में सेवानिवृत्त इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन भी शामिल थे। समिति ने सुझाव दिया था कि परीक्षा प्रणाली को साइबर अपराध और पेपर लीक से बचाने के लिए हाई-टेक निगरानी तंत्र अपनाया जाए।
याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में कम से कम 13 पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से चार मामलों की जांच सीबीआई कर रही है, जबकि अन्य मामलों की जांच राज्य पुलिस एजेंसियों द्वारा की जा रही है।







