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पहले 48 घंटों का महत्वः स्वाइन फ्लू के मामलों में शुरुआती कदम क्यों जरूरी है -डॉ. दीप्ति मास्के 

(विश्व परिवार)। H1N1 फ्लू एक बार फिर से फैल रहा है। मौसम में बदलाव के दौरान H1N1 जैसे वायरल संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाने वाला यह संक्रमण 2009 की महामारी के दौरान हुई मौतों के कारण चर्चा में आया था। उस समय यह एक सामान्य प्रकोप से बढ़कर एक बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल गया था। टीकों की मदद से इस संकट को नियंत्रित किया गया, लेकिन स्वाइन फ्लू आज भी एक मौसमी बीमारी है, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील समूहों के लिए खतरा बनी हुई है। इस गंभीर संक्रमण को रोकने के लिए शुरूआती इलाज और शीघ्र उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं।

स्वाइन फ्लू क्या है?

स्वाइन फ्लू या H1N1 इन्फ्लुएंजा सांस की एक संक्रामक बीमारी है, जो Influenza A वायरस के कारण होती है। यह शरीर के श्वसन तंत्रः सांस लेने की प्रणाली को प्रभावित करती है। इसके शुरुआती संक्रमणों का संबंध, सूअरों में पाए जाने वाले इन्फ्लुएंजा वायरस से था, जिसके कारण इसे ‘स्वाइन फ्लू’ नाम दिया गया। 2009 की महामारी के दौरान इन्फ्लुएंजा वायरस में मौजूद आनुवंशिक सामग्री का संबंध सूअरों, चमगादड़ों और मनुष्यों में पाए जाने वाले वायरस से पाया गया था।

यह कैसे फैलता है?

मौसमी फ्लू की तरह H1N1 वायरस मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इन तरीकों से फैलता है:

छींक या खांसी की बूंदें: जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो वायरस वाली छोटी बूंदें हवा में फैल सकती हैं, जिन्हें आसपास मौजूद लोग सांस के जरिए अंदर ले सकते हैं।

संपर्क के माध्यम सेः संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। ऐसा हाथ मिलाने या संक्रमित व्यक्ति के शरीर के किसी हिस्से को छूने पर भी हो सकता है।

सतहों के माध्यम सेः वायरस कुछ समय तक दरवाजों के हैंडल, मोबाइल फोन और टेबल जैसी सतहों पर जीवित रह सकता है। यदि कोई व्यक्ति इन सतहों को छूने के बाद अपने चेहरे को छूता है, तो उसके संक्रमित होने की संभावना बढ़ सकती है।

समय पर उपचार क्यों जरूरी है?

पहले 48 घंटों के दौरान इन्फ्लुएंजा वायरस शरीर के अंदर तेजी से बढ़ता है। ओसेल्ट्रामिविर (Oseltamivir) जैसी दवाएं वायरस को बढ़ने से रोक सकती हैं, जिससे संक्रमण के फैलने की अवधि कम हो जाती है। इससे फेफड़ों में गंभीर संक्रमण, सांस लेने में परेशानी, अस्पताल में भर्ती होने या यहां तक कि मृत्यु का जोखिम भी कम हो सकता है।

जो लोग संक्रमण के अधिक जोखिम में हैं, उनके लिए समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा, मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, किडनी की बीमारी या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) जैसी लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

खुद से बीमारी का निदान करने और इलाज में देरी से बचें

फ्लू को सामान्य वायरल बुखार समझने की गलती हो सकती है। व्यक्ति घर पर ही दवाएं लेकर लक्षणों को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, इन दवाओं से शुरुआत में लक्षण कम हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे संक्रमण को गंभीर होने से रोकें।

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से सही उपचार में देरी हो सकती है और शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है, जिसके कारण डॉक्टर द्वारा जांच के बाद दी जाने वाली अन्म दवाएं कम प्रभावी हो सकती हैं। ऐसी देरी से बीमारी गंभीर हो सकती है।

लोगों द्वारा की जाने वाली एक बड़ी गलती जरूरत न होने पर भी दवाएं लेना है। चिकित्सा सहायता लेने में देरी करने और शुरुआती उपचार का मौका गंवाने के बजाय, यदि लक्षण लगातार बने रहते हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

शुरुआती संकेतों को पहचानें

समय पर सही चिकित्सा देखभाल मिलने पर मरीज तेजी से ठीक हो सकते हैं। कुछ लक्षणों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि वे मरीज की स्थिति गंभीर होने का संकेत हो सकते हैं।

इन लक्षणों में शामिल हैं: सांस फूलने या सांस लेने में बढ़ती परेशानी, तेज या कठिन सांस लेना, सीने में दर्द, होंठ या उंगलियों के सिरों का नीला पड़ना, भ्रम या असमंजस की स्थिति, अत्यधिक नींद आना, खाने या पीने में असमर्थता, उल्ट्री। ये सभी गंभीर चेतावनी संकेत हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

स्वाइन फ्लू से कैसे बचें?

स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचने और इसे समुदाय में फैलने से रोकने के लिए कुछ सावधानियां बरती जा सकती हैं। आप अपनी सुरक्षा के लिए इन उपायों को अपना सकते हैं:

व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखेंः भोजन से पहले, साझा सतहों को छूने के बाद और फ्लू जैसे लक्षणों वाले व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना जरूरी है। साझा स्थानों को साफ-सुथरा रखें और बार-बार छुई जाने वाली वस्तुओं को अनावश्यक रूप से छूने से बचें।

खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकेंः खांसते या छींकते समय टिश्यू या अपनी कोहनी से नाक और मुंह को ढकें। खासकर तब मास्क जरूर पहनें जब आपको फ्लू जैसे लक्षण हों या आप अस्वस्थ महसूस कर रहे हों। इससे आपकी और आपके आसपास के लोगों की सुरक्षा होती है।

बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें: जब आप बीमार हों, तो दूसरों से दूरी बनाए रखें, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों जैसे संवेदनशील समूहों से।

टीका लगवाएं: हर साल फ्लू/इन्फ्लुएंजा का टीका लगवाएं। फ्लू का टीका संक्रमण को रोकने के साथ-साथ बाद में गंभीर लक्षण विकसित होने के जोखिम को भी कम कर सकता है।

स्वाइन फ्लू तेजी से फैलने वाला संक्रमण है। कुछ आसान आदतों और सावधानियों को अपनाकर आप खुद को और अपने आसपास के लोगों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।

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