छत्तीसगढ़भिलाई

श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में डिजिटल हर्बेरियम पर कार्यशाला

भिलाई (विश्व परिवार)। श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के जीवन विज्ञान संकाय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा शिक्षा मंत्रालय की पहल संस्थान नवाचार परिषद (IIC) के अंतर्गत “ओजोन परत की रक्षा करें, अपने कल की रक्षा करें” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डिजिटल हर्बेरियम पर कार्यशाला और “पर्यावरण में ओजोन परत का महत्व” विषय पर वैज्ञानिक पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. स्मिता सेलट ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार डिजिटल हर्बेरियम का फीता काटकर और क्यूआर कोड स्कैन करके किया। बीएससी प्रथम सेमेस्टर वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद 30 से अधिक पौधों का विश्लेषण कर उन्हें डिजिटल हर्बेरियम के रूप में प्रस्तुत किया।

कुलपति डॉ. स्मिता सेलट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनजागरूकता की आवश्यकता है। बढ़ता तापमान और प्राकृतिक आपदाएं हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति सचेत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और ओजोन परत के क्षरण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रयास किए जाने की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल हर्बेरियम की सराहना करते हुए कहा कि इसके माध्यम से वनस्पति प्रजातियों की विस्तृत जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित रखी जा सकती है।

इस अवसर पर कुलपति ने पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए।

डिजिटल हर्बेरियम कार्यशाला का संचालन डॉ. अनामिका तिवारी ने किया। कार्यशाला में कुल 120 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों में पादप नमूनों के संग्रह एवं प्रलेखन, पौधों की विशेषताओं का डिजिटल प्रलेखन, पादप डेटाबेस एवं डिजिटल अभिलेखों का महत्व, डिजिटल हर्बेरियम नमूनों की तैयारी एवं प्रस्तुति तथा शिक्षण, अनुसंधान, जैव विविधता प्रलेखन एवं संरक्षण में इसके उपयोग पर चर्चा की गई।

अपराह्न सत्र में वनस्पति विज्ञान विभाग में वैज्ञानिक पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें 10 से अधिक प्रतिभागियों ने ओजोन दिवस की विषयवस्तु पर वैज्ञानिक पोस्टर प्रस्तुत किए। पोस्टरों में ओजोन परत का महत्व एवं संरक्षण, ओजोन परत का क्षरण, पर्यावरण संरक्षण में पौधों की भूमिका और सतत विकास जैसे विषय शामिल रहे।

पोस्टरों का मूल्यांकन डॉ. राजेश चौधरी, फार्मेसी विभाग और डॉ. श्वेता सिंह, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों से उनके पोस्टर और विषय से संबंधित जानकारी पर संवाद भी किया। विजेताओं की घोषणा और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम का समन्वय विद्यार्थी समन्वयकों आन्या साहू, सिमरन कौर और जय वर्मा ने किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अनामिका तिवारी ने बताया कि विद्यार्थियों को डिजिटल हर्बेरियम तैयार करने और पौधों के प्रलेखन की आधुनिक विधियों का व्यावहारिक अनुभव मिला। साथ ही, ओजोन परत एवं पर्यावरण संरक्षण में पौधों की भूमिका को लेकर उनकी समझ विकसित हुई। इससे विद्यार्थियों के अनुसंधान, सामूहिक कार्य और वैज्ञानिक संप्रेषण कौशल में वृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।

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