रायपुर (विश्व परिवार)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 29 जनवरी 2026 को “ए आई ड्रिवेन एग्रीटेक एंड फिनटेक विथ ब्लॉकचैन फॉर सिक्योर डिजिटल फाइनेंस” (AIAF-BSDF 2026)” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। यह कार्यशाला 29 से 30 जनवरी 2026 तक “स्टार्टअप, उद्योग और नवाचार के बीच सेतु” थीम के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है।
उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड, छत्तीसगढ़ शासन के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। समारोह की शोभा बढ़ाने वालों में आईआईटी हैदराबाद के पूर्व डीन, पब्लिक एंड कॉर्पोरेट रिलेशन , डॉ. सी. कृष्ण मोहन, अवेंट्रा टेक्नोलॉजीज प्रा. लि., रायपुर के सीईओ श्री मनीष के. टिकरिहा, एनआईटी रायपुर के कुलसचिव डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे तथा कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया शामिल रहे। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. प्रीति चंद्राकर एवं डॉ. के. जयराम नाइक, सहायक प्राध्यापक, एनआईटी रायपुर है।
डॉ. प्रीति चंद्राकर ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और एआई, फिनटेक, एग्रीटेक तथा ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के शोध एवं उसकी स्वीकारिता के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों की सशक्त उपस्थिति उद्योग की बढ़ती रुचि तथा शैक्षणिक ज्ञान और वास्तविक अनुप्रयोगों के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता को दर्शाती है। डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया ने डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में भरोसे की भूमिका पर जोर देते हुए भुगतान, उधार तथा निर्माण से जुडी तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की अपार संभावनाओं, निर्णय-निर्माण में एआई के परिवर्तनकारी प्रभाव तथा भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल वित्त पारिस्थितिकी तंत्र में धोखाधड़ी के बढ़ते जोखिमों को रेखांकित किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्य कर राष्ट्रीय स्तर के समाधान प्रदान करने वाले स्टार्टअप्स की सराहना की।
डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि यह कार्यशाला किसानों की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने हेतु नवाचारी समाधानों की पहचान में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनौतियों के बावजूद, प्रौद्योगिकी विशेष रूप से ह्यूमन-साइबर फ्यूजन सिस्टम विषय के सुरक्षित और बुद्धिमान फिनटेक समाधानों को आकार देगी। डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे ने तीव्र डिजिटल परिवर्तन और इस परिवर्तन में एनआईटी रायपुर की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान के विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया, जो अपने पेशेवर एवं औद्योगिक योगदान के माध्यम से संस्थान की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ कर रहे हैं।
डॉ. सी. कृष्ण मोहन ने कृषि अवसंरचना के रूपांतरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि एआई सूचित निर्णय-निर्माण, सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, समय की बचत तथा लागत में कमी लाने में सहायक है। उन्होंने समयोचित और प्रभावशाली विषय पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए एनआईटी रायपुर की प्रशंसा की। श्री मनीष के. टिकरिहा ने बिजनेस एआई और नैतिक प्रौद्योगिकी उपयोग के महत्व पर बल दिया तथा बताया कि इन विषयों पर उनके तकनीकी सत्र में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
मुख्य अतिथि श्री चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों के कल्याण एवं कृषि विकास के लिए व्यावहारिक समाधानों की पहचान करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से विनम्र, सामाजिक रूप से जिम्मेदार रहने तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया और राष्ट्रीय विकास से जुड़ी नवाचारी पहलों के लिए सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।
उद्घाटन सत्र का समापन सम्मान समारोह एवं डॉ. के. जयराम नाइक द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सभी गणमान्य अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम ने कृषि और डिजिटल वित्त पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने में एआई और ब्लॉकचेन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। इसने नवाचार-आधारित और वास्तविक-दुनिया के समाधानों के प्रति एनआईटी रायपुर की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।





