खैरागढ़ (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर में आवारा कुत्तों का आतंक देखने को मिला है। सनसिटी कॉलोनी में 5 साल के मासूम पर चार आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। इस हमले में मासूम घायल हो गया और उसके शरीर में कई जगहों पर गहरे घाव बन गए हैं। दिल दहला देने वाली यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चा कॉलोनी में खेल रहा था। तभी अचानक चार आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया। मासूम अपनी जान बचाने के लिए भागने लगा, लेकिन कुत्तों का झुंड उसके पीछे पड़ गया और उसे घसीटकर नोच डाला। कुछ सेकंड तक चले इस खौफनाक हमले में मासूम बुरी तरह घायल हो गया। उसके पैरों, जांघों और पीठ पर गहरे घाव बने हैं।
युवक ने बचाई मासूम की जान
बताया जा रहा है कि बच्चे का अस्पताल में इलाज जारी है और वह मानसिक रूप से भी गहरे सदमे में है। घटना का सबसे भयावह पहलू यह है कि यदि मौके पर मौजूद युवक बीच-बचाव नहीं करता, तो यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता था।
कॉलोनी में दहशत का माहौल
इस घटना के बाद सनसिटी कॉलोनी में दहशत का माहौल है। माता-पिता बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों ने कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं की। लोगों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते हैं और राहगीरों का पीछा करते हैं, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।
अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग
शहरवासियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई की जरूरत है। लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से तत्काल विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ने, संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ाने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने की मांग की है। क्योंकि इस बार शिकार एक मासूम बच्चा बना है, लेकिन यदि हालात नहीं बदले तो अगला हादसा और भी भयावह हो सकता है।
लगातार सामने आ रही डॉग बाइट की घटनाएं
चिंता की बात यह भी है कि जिले में डॉग बाइट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में डोंगरगढ़ क्षेत्र में भी एक कथित उग्र कुत्ते ने दो नाबालिग बच्चों को घायल कर दिया था। लगातार हो रही घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।







