धर्म

जैन तीर्थ अयोध्या में भगवान मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न

भगवान ऋषभदेव इस धरती के प्रथम राजा-योगी आदित्यनाथ 

अयोध्या  (विश्व परिवार)। श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज परिसर में भगवान मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सानंद सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम गुरुआज्ञा के साथ प्रारंभ हुआ समारोह। समारोह का ध्वजारोहण करने का सौभाग्य प्रमोद जैन, सुबोध जैन, मॉडल टाउन, दिल्ली के हाथों से सम्पन्न हुआ। इसी क्रम में सौधर्म इन्द्र सिद्धार्थ जैन-सौ. दीप्ति जैन-लखनऊ एवं आदीश जैन-स्मृति जैन के द्वारा झण्डारोहण की क्रियाएँ सम्पन्न की गयीं। घटयात्रा के द्वारा शोभायात्रा निकाली गयी एवं मण्डप उद्घाटन श्री वैâलाशचंद जैन सर्राफ-लखनऊ के द्वारा सम्पन्न हुआ। मुख्य वेदी में मंगल कलश स्थापित अध्यात्म-अर्पिता जैन-लखनऊ के द्वारा किया गया एवं कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन करने का सौभाग्य श्रीमती बीनारानी जैन, चौक-लखनऊ को प्राप्त हुआ। भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य डॉ. राधा-दिनेश जैन, डालीगंज-लखनऊ को प्राप्त हुआ। गर्भकल्याणक की संध्या पर माता की गोद भराई एवं पिता का सम्मान किया गया एवं सौधर्म इन्द्र की सुधर्मा सभा का बहुत सुंदर मंचन किया गया, जिसमें समस्त इन्द्र-इन्द्राणियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जन्मकल्याणक की शोभायात्रा अयोध्या के मुख्य मार्ग रामपथ होते हुए तुलसी उद्यान तक गयी एवं वापस रायगंज दिगम्बर जैन मंदिर पहुँचकर पाण्डुकशिला पर भगवान का जन्माभिषेक सम्पन्न किया गया। सायं पालने एवं बालक्रीड़ा का बहुत सुुंदर कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। अनेक स्थानों से बसें एवं कारों के माध्यम से जनसमूह उपस्थित हुआ।
तपकल्याणक के दिवस उत्तरप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन हुआ। सर्वप्रथम पीठधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने पुष्पगुच्छ देकर माननीय मुख्यमंत्री जी का अभिवादन किया। इसी क्रम में कमेटी के मंत्रीगण विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, शुभचंद जैन ने पुष्पगुच्छ देकर माननीय मुख्यमंत्री जी का स्वागत किया एवं इसी शृंखला में तीर्थ पर सुंदर नवनिर्मित द्वार का उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री जी के करकमलों से किया गया, जिसका पुण्यार्जन आदीश जैन-स्मृति जैन परिवार, चौक, लखनऊ के द्वारा हुआ। जिसमें उन्होंने शिलापट्ट का अनावरण एवं स्वस्तिक बनाकर उद्घाटन किया। इसी क्रम में भगवान ऋषभदेव के १०१ पुत्र सिद्धपरमेष्ठी भगवन्तों के जिनमंदिर का भी उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री जी ने मंदिर के दर्शन किए एवं परमपूज्य गणिनप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के दर्शन एवं वार्तालाप किया। तीर्थ विकास के संदर्भ में विचारों का आदान-प्रदान किया। इस समय साथ में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका  चंदनामती माताजी, तीर्थ के अध्यक्ष कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के साथ मंदिर निर्माता संघपति  अनिल कुमार-सौ. अनीता जैन, सौ. अनामिका-निकुंज जैन परिवार, प्रीतविहार, दिल्ली उपस्थित थे। इस अवसर पर अयोध्या के स्थानीय विधायक  वेदप्रकाश गुप्ता भी समस्त कार्यक्रम में उपस्थित थे।
इसके पश्चात् मुख्यमंत्री का मंच पर आगमन हुआ। सर्वप्रथम मंच पर विराजमान आचार्य श्री भद्रबाहुसागर जी महाराज व गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी को श्रीफल समर्पित करके दर्शन किये। पश्चात् मुख्यमंत्री जी का मंच पर तिलक लगाकर कमेटी के मंत्री विजय कुमार जैन ने तिलक लगाकर स्वागत किया एवं समिति के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने पगड़ी पहनाकर एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री जी का सम्मान किया। पंचकल्याणक के शुभ अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने रत्नवृष्टि की। सभा का शुभारंभ पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के द्वारा मंगलाचरण हुआ। पश्चात् पीठधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने तीर्थ के विषय में संक्षिप्त जानकारी माननीय मुख्यमंत्री जी को प्रदान की। तत्पश्चात् तीर्थ विकास की सम्प्रेरिका जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि भगवान ऋषभदेव, जिन्होंने प्रजा को जीवन जीने की कला सिखाई एवं नारी शिक्षा का प्रथम सूत्रपात इसी धरती से किया। मुझे गर्व है कि मोदी एवं योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में राममंदिर के कार्य को सम्पन्न कर लिया, जो एक संस्कृति के संवर्धन में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पंचकल्याणक सम्पन्न हो रहा है। ये एक इतिहास जीवंत हो रहा है। भगवान श्रीराम का जन्म भगवान मुनिसुव्रतनाथ के काल में हुआ था। इसीलिए मेरी प्रेरणा से यह इतिहास यहाँ पर निर्मित किया गया है। योगी और मोदी सरकार को हमारा खूब-खूब मंगल आशीर्वाद है। इसी प्रकार से वे संस्कृति और संवर्धन में सदैव कार्य करते रहें।
इस क्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने भाषण में सर्वप्रथम भगवान ऋषभदेव की जय बोलते हुए कहा कि भगवान ऋषभदेव इस धरती के प्रथम राजा थे। उनके पुत्र भरत के नाम से इस देश का नाम भारत पड़ा। ये धरती तीर्थंकरों के जन्म से पावन एवं पवित्र है। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ, चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ, पाँचवें भगवान सुमतिनाथ एवं चौदहवें तीर्थकर भगवान अनंतनाथ के जन्म से पावन एवं पवित्र है। २४ में से अनेक तीर्थंकरों का जन्म इस धरती पर हुआ है। वाराणसी में चार तीर्थंकर, हस्तिनापुर में ३ तीर्थंकर का जन्म हुआ है। श्रावस्ती में भगवान संभवनाथ का जन्म हुआ है। इस अवसर पर गाय के संरक्षण, संवर्धन का भी माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने भाषण में जिक्र किया एवं अयोध्या चहुमुखी विकास किया। पूज्य ज्ञानमती माताजी एक पवित्र आत्मा हैं, जिनका दर्शन करने की इच्छा मेरे मन में विगत कई दिनों से थी। इस कार्यक्रम का आमंत्रण मुझे माननीय पीठाधीश रवीन्द्रकीर्ति जी ने लखनऊ में दिया। उसी समय मैंने कार्यक्रम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की एवं आने की स्वीकृति दी। सभी प्रांतों से लोग यहाँ सम्मिलित हुए हैं। उन सभी का मैं सरकार की तरफ से अभिनंदन करता हूँ एवं पूज्य पीठाधीश के जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने पुष्पगुच्छ प्रदान किया एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना की।
इसके पश्चात् मुनिसुव्रतनाथ भगवान की दीक्षा का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया एवं तपकल्याणक की क्रियाएँ सम्पन्न की गयीं। अगले दिन तीर्थंकर मुनि मुनिसुव्रतनाथ भगवान का आहार सम्पन्न किया गया। प्रथम आहार देने का सौभाग्य श्री जितेन्द्र जैन ‘लल्ला’-सौ. वैशाली जैन-तहसील फतेहपुर को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात् मध्यान्ह में केवलज्ञानकल्याणक की क्रियाएँ सम्पन्न की। भगवान के समवसरण की रचना हुई, जिसमें दिव्यध्वनि आचार्य श्री भद्रबाहुसागर जी महाराज एवं गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा सम्पन्न की गयी। रात्रि में सभी का सम्मान किया गया। अगले दिन मोक्षकल्याणक की सभी क्रियाएँ की गयी, जिसमें भगवान मुनिसुव्रतनाथ सम्मेदशिखर की पावन धरा से मोक्ष गये। पर्वत बनाकर उस पर मोक्षकल्याणक की क्रियाएँ सम्पन्न की गयीं एवं भगवान का मस्तकाभिषेक एवं निर्वाणलाडू समर्पित किया गया। तत्पश्चात् नवीन जिनमंदिरों में भगवान विराजमान एवं कलशारोहण करके पूर्ण आहुति दी गयी। इसी के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सानंद सम्पन्न हुआ।

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