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रिसर्च को वास्तविक इनोवेशन से जोड़ने के लिए एनआईटी रायपुर और अवकलन लैब्स साथ आए

  • इंडस्ट्री से जुड़ी रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए सहयोग।

रायपुर (विश्व परिवार)। भारत के रिसर्च इकोसिस्टम के सामने लंबे समय से एक चुनौती रही है, अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों में कैसे बदला जाए। विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों में उपयोगी ज्ञान और पब्लिकेशन्स तैयार होते हैं, लेकिन उनमें से कई अकादमिक दायरे तक ही सीमित रह जाते हैं। उन्हें इंडस्ट्रियल एप्लिकेशन्स, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और वास्तविक समस्याओं के समाधान देने वाले प्रोडक्ट्स तक पहुँचाना आसान नहीं होता।

इसी दूरी को कम करने की दिशा में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) रायपुर और अवकलन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का फोकस कम्प्यूटेशनल इंजीनियरिंग, एडवांस्ड सिमुलेशन टेक्नोलॉजीज़ और इंजीनियरिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर है।

एमओयू पर एनआईटी रायपुर के डायरेक्टर डॉ. एन. वी. रमना राव और डायरेक्टर, अवकलन लैब्स डॉ कमल शंकर पटेल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डॉ. गंगाधर रामटेक्कर, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग; डॉ. एस. सान्याल, प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग; और डॉ. शिरीष वी. देव, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग उपस्थित रहे। इस एम् ओ यु के तहत की जाने वाली सारी गतिविधियों का संचालन डॉ. गंगाधर रामटेक्कर, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, डॉ. मोहित जायसवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग और डायरेक्टर, अवकलन लैब्स डॉ कमल शंकर पटेल की देखरेख में किया जाएगा |

इस साझेदारी के तहत जॉइंट रिसर्च, प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, इंडस्ट्री-स्पॉन्सर्ड पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टोरल रिसर्च, तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के अवसर तलाशे जाएंगे। इसका उद्देश्य अकादमिक विशेषज्ञता को इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ना और उसे औद्योगिक प्रगति तथा समाज के हित में उपयोगी बनाना है।

रिसर्च पब्लिकेशन्स से वास्तविक प्रभाव तक
अवकलन लैब्स के को-फाउंडर डॉ. कमल शंकर पटेल के लिए यह उद्देश्य उनके अपने अनुभव से जुड़ा है। एनआईटी रायपुर से कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स में पीएचडी करने और अकादमिक क्षेत्र में काम करने के कारण वे रिसर्च के महत्व और उसे व्यावहारिक नतीजों तक ले जाने की चुनौतियों, दोनों को समझते हैं।

रिसर्च पब्लिकेशन्स वैज्ञानिक प्रगति के लिए जरूरी हैं, लेकिन जब रिसर्च इंजीनियरिंग एप्लिकेशन्स, वैलिडेटेड टेक्नोलॉजीज़ या प्रोडक्ट्स की दिशा में आगे नहीं बढ़ती, तो उसका प्रभाव सीमित रह सकता है। इस दूरी को कम करने के लिए रिसर्चर्स और इंडस्ट्री की समस्याओं पर काम करने वाले संगठनों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।

अवकलन लैब्स की स्थापना इसी व्यापक सोच के साथ हुई, कम्प्यूटेशनल साइंस को वास्तविक इंजीनियरिंग समस्याओं से जोड़ना और एडवांस्ड रिसर्च क्षमताएँ विकसित करना। एनआईटी रायपुर के साथ यह सहयोग ऐसा रास्ता बनाने की दिशा में एक कदम है, जहाँ अकादमिक ज्ञान और इंडस्ट्री की जरूरतें एक-दूसरे को दिशा दे सकें।

सिद्धांत सरल है: रिसर्च का सफर पब्लिकेशन पर खत्म नहीं होना चाहिए; उसे समस्याओं के समाधान, नई टेक्नोलॉजी के विकास और समाज के लाभ के अवसर भी पैदा करने चाहिए।

इंडस्ट्री और अकादमिया के बीच मजबूत साझेदारी
समझौते के तहत दोनों संस्थान कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स, फाइनाइट एलिमेंट एनालिसिस और मल्टीफिजिक्स सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में स्टूडेंट इंटर्नशिप, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग, अकादमिक प्रोजेक्ट्स और साझा रिसर्च की संभावनाएँ तलाशेंगे।

इस साझेदारी से जॉइंट पब्लिकेशन्स, पेटेंट्स और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को बढ़ावा मिल सकता है। इसके जरिए रिसर्च को व्यावहारिक इंजीनियरिंग समाधानों तक ले जाने की संभावनाएँ भी बनेंगी। समझौता इंडस्ट्री की चुनौतियों से जुड़े एम.टेक. और पीएचडी रिसर्च के लिए इंडस्ट्री-स्पॉन्सर्ड अवसरों का ढाँचा भी देता है। ऐसे अवसर आपसी सहमति से तय किए गए प्रोजेक्ट प्लान और फंडिंग पर निर्भर होंगे।

स्टूडेंट्स को वास्तविक इंजीनियरिंग समस्याओं पर काम करने और एडवांस्ड रिसर्च व डेवलपमेंट से जुड़ी स्किल्स सीखने का मौका मिल सकता है। फैकल्टी इंडस्ट्री से जुड़ी चुनौतियों पर काम कर सकती है, जबकि अवकलन लैब्स अकादमिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर जटिल समस्याओं की पड़ताल और नए कम्प्यूटेशनल तरीकों को आगे बढ़ा सकती है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संभावनाएँ
समझौते का एक अहम हिस्सा एनआईटी रायपुर में कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की संभावना तलाशना है।

प्रस्तावित सेंटर साझा रिसर्च, विशेष प्रशिक्षण और एडवांस्ड कम्प्यूटेशनल मेथड्स के विकास को समर्थन दे सकता है। इसके संभावित क्षेत्रों में स्ट्रक्चरल मैकेनिक्स, इंजीनियरिंग ऑप्टिमाइजेशन और मल्टीफिजिक्स सिमुलेशन शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ से डीप-टेक रिसर्च को आगे बढ़ाना
2023 में स्थापित अवकलन लैब्स की शुरुआत आईआईटी रुड़की में इनक्यूबेशन के साथ हुई। 2025 में कंपनी ने अपना ऑपरेशनल बेस रायपुर में स्थानांतरित किया। कंपनी कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स, कम्प्यूटर-एडेड इंजीनियरिंग, मल्टीफिजिक्स सिमुलेशन, प्रोडक्ट डिजाइन और हाई-परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग के क्षेत्रों में काम करती है।

कंपनी का दीर्घकालीन लक्ष्य प्राइवेट सेक्टर में एक मल्टीडोमेन रिसर्च लैब बनाना और एडवांस्ड इंजीनियरिंग व कम्प्यूटेशनल टेक्नोलॉजीज़ में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान देना है।

यह सहयोग छत्तीसगढ़ के रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने का अवसर भी देता है। इंडस्ट्री और अकादमिया के बीच बेहतर तालमेल से विशेष कौशल वाले प्रतिभाशाली लोगों को विकसित करने, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और स्थानीय रिसर्च क्षमताओं को व्यापक औद्योगिक व सामाजिक चुनौतियों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

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