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CII ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट 2026 ने छत्तीसगढ़ में कम-कार्बन और भविष्य के लिए तैयार स्टील क्षेत्र की दिशा तय की

  • भारत में ग्रीन स्टील के संक्रमण को गति देने के लिए तकनीक, ऊर्जा दक्षता और नवाचार पर उद्योग एवं सरकार का जोर

नवा रायपुर (विश्व परिवार)। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा आयोजित CII ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट 2026 के पांचवें संस्करण का आज छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  अरुण साव एवं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने उद्घाटन किया। दो दिवसीय इस समिट में सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, स्टील एवं माइनिंग कंपनियों, तकनीकी प्रदाताओं, सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों तथा उद्योग जगत के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। समिट में प्रतिस्पर्धी, ऊर्जा-कुशल और कम-कार्बन वाले स्टील क्षेत्र की दिशा में संक्रमण को लेकर व्यापक मंथन किया गया।

समिट का मुख्य फोकस क्लीन टेक्नोलॉजी, ऊर्जा दक्षता, डिजिटलाइजेशन, कार्बन मैनेजमेंट और सतत खनन पद्धतियों को तेजी से अपनाने पर रहा। साथ ही, स्टील एवं माइनिंग क्षेत्र को भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। उद्घाटन सत्र में उद्योग जगत की ओर से CII छत्तीसगढ़ के चेयरमैन बजरंग गोयल, CII ईस्टर्न रीजन की स्टील सब-कमेटी के चेयरमैन सिद्धार्थ अग्रवाल तथा CII छत्तीसगढ़ के पूर्व चेयरमैन नरेंद्र गोयल ने अपने विचार रखे।

समिट को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से कोयला एवं खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और देश के प्रमुख स्टील उत्पादक केंद्रों में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बना चुका है। अब समय आ गया है कि राज्य केवल खनिज संपदा से समृद्ध राज्य होने तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रीन एवं वैल्यू-एडेड स्टील के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास का अगला चरण केवल इस बात से तय नहीं होगा कि राज्य कितना स्टील उत्पादन करता है, बल्कि इस बात से भी तय होगा कि स्टील का उत्पादन कितनी स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जाता है। उन्होंने CII के इस आयोजन को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह मंच उद्योग और विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाकर देश के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक राज्यों में से एक के लिए अधिक टिकाऊ भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। छत्तीसगढ़ की मजबूत प्राकृतिक संसाधन क्षमता, मेहनतकश मानव संसाधन और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण राज्य को ग्रीन स्टील एवं सतत औद्योगिक विकास की दिशा में देश का नेतृत्व करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

छत्तीसगढ़ शासन के माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि समृद्ध खनिज संसाधनों, मजबूत औद्योगिक आधार और बढ़ते निवेश इकोसिस्टम के कारण छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख स्टील एवं औद्योगिक केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। अब सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यह विकास सतत, तकनीक-आधारित और रोजगार एवं वैल्यू क्रिएशन के अधिक अवसर पैदा करने वाला हो। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति 2024 के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत किया जा रहा है और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। CII ग्रीन स्टील एंड माइनिंग समिट उद्योग, निवेशकों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर ग्रीन स्टील, जिम्मेदार खनन और सतत औद्योगिक विकास की दिशा में बदलाव को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

समिट के ब्रेकआउट सत्र में छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरण एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भारत की हरित, सतत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की यात्रा में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्टील, माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में राज्य यह मानता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि उद्योग और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच इस बात को लेकर व्यापक सहमति है कि ग्रीन टेक्नोलॉजी केवल नियामकीय दायित्व नहीं, बल्कि एक बड़ा व्यावसायिक अवसर भी है। राज्य ग्रीन स्टील के क्षेत्र में रिसर्च एवं डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में ग्रीन-सर्टिफाइड उत्पादों को प्राथमिकता देने के लिए नीतिगत संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। सरकार जिम्मेदार औद्योगिक विकास, नवाचार एवं निवेश को प्रोत्साहित करने वाला सक्षम वातावरण तैयार करने तथा कम-कार्बन और सतत भविष्य के भारत के विजन में छत्तीसगढ़ के योगदान को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

समिट के पहले प्रमुख पैनल डिस्कशन “फ्यूचर-रेडी – इंडिया’स स्टील सेक्टर इन 2047” में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि वर्ष 2047 तक भारतीय स्टील उद्योग विकास के अगले चरण के लिए स्वयं को किस प्रकार तैयार कर सकता है और डीकार्बोनाइजेशन एवं सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी बढ़ती अपेक्षाओं को किस तरह पूरा किया जा सकता है। इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्र “टेक्नोलॉजी इंटरवेंशन फॉर ऑप्टिमाइजिंग एनर्जी कंजम्पशन इन स्टील इंडस्ट्री” में स्टील निर्माण एवं इससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों में ऊर्जा प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी हस्तक्षेपों और व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गई।

दूसरे तकनीकी सत्र “लीवरेजिंग AI एंड डिजिटल ट्रैकिंग फॉर कार्बन कैप्चर एंड मैनेजमेंट” में कार्बन फुटप्रिंट को मापने, प्रबंधित करने और कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर मंथन किया गया। दिन का समापन “नेविगेटिंग द इकोनॉमिक्स ऑफ लो-कार्बन स्टील” विषय पर आयोजित CEO राउंड टेबल के साथ हुआ। इसमें रियल इस्पात एंड पावर, सरदा एनर्जी एंड मिनरल्स, टाटा स्टील स्पेशल इकोनॉमिक जोन,  बजरंग पावर एंड इस्पात, जिंदल स्टील, भिलाई स्टील प्लांट (SAIL) और अमलगम स्टील के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया।

CEO राउंड टेबल में लो-कार्बन स्टील की ओर संक्रमण के आर्थिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें नई तकनीकों में निवेश, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, परिचालन दक्षता तथा डीकार्बोनाइजेशन और व्यावसायिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुख रहे। समिट में हुई व्यापक चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि भविष्य का स्टील उद्योग केवल उत्पादन की क्षमता से नहीं, बल्कि तकनीक, ऊर्जा दक्षता, नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की क्षमता से परिभाषित होगा। छत्तीसगढ़, अपनी मजबूत औद्योगिक एवं खनिज आधारभूमि के साथ, भारत के ग्रीन स्टील और सतत औद्योगिक विकास के अगले अध्याय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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