छत्तीसगढ़

आरंग में 25-30 गरीब परिवारों के सिर पर मंडरा रहा खतरा, जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर

आरंग (विश्व परिवार)। एक तरफ शासन-प्रशासन हर बेघर को पक्की छत देने के बड़े-बड़े दावे करता है तो दूसरी तरफ राजधानी रायपुर से महज 35 किलोमीटर दूर नगर पालिका आरंग के वार्ड क्रमांक 07 में प्रशासनिक उपेक्षा और भेदभाव की खौफनाक हकीकत सामने आई है। यहां कई गरीब परिवार आज भी मिट्टी के जर्जर और ढहते मकानों में अपनी जान हथेली पर रखकर रहने को मजबूर हैं। बारिश और मौसम की मार से मिट्टी की दीवारें धीरे-धीरे जमींदोज हो रही हैं, जिससे इन परिवारों के सिर पर हर पल मौत का साया मंडरा रहा है। तस्वीरों को देखकर लगता है कि यह दृश्य किसी बेहद पिछड़े दूरस्थ इलाके का है, लेकिन हकीकत यह है कि यह बदहाली आरंग के मुख्य क्षेत्र की है।
पीड़ितों ने कहा – क्या नियम केवल गरीबों के लिए..?
स्थानीय निवासी लाता निर्मलकर, नंदनी जलक्षत्री, डिगम पटेल एवं अन्य पीड़ितों ने अपनी दर्द बयां करते हुए बताया कि उनका मकान ऐतिहासिक व पुरातात्विक जैन तीर्थंकर मंदिर (भांडदेवल मंदिर) से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह तर्क देकर उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के लाभ से लगातार वंचित किया जा रहा है कि यह क्षेत्र पुरातात्विक संरक्षण नियमों के दायरे में आता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियम-कानून की यह सख्ती सिर्फ चुनिंदा गरीबों पर ही क्यों लागू हो रही है?
पीड़ितों ने गंभीर आरोप लगाया है कि भांडदेवल मंदिर की बाउंड्रीवॉल से बिल्कुल सटे हुए कई अन्य प्रभावशाली लोगों के पक्के आवास स्वीकृत कर दिए गए हैं और उनका निर्माण भी हो चुका है। ऐसे में मंदिर से 100 मीटर दूर रहने वाले 25 से 30 गरीब परिवारों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
जनदर्शन से लेकर अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके पीड़ित
मंदिर के आसपास स्थित लगभग 25 से 30 परिवारों के लिए अब सिर छिपाना भी दूभर हो चुका है। जर्जर मिट्टी की दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। पीड़ितों ने बताया कि वे पक्के आवास की मांग को लेकर पिछले 8 सालों में दर्जनों बार प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री के जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर भी अपनी व्यथा सुनाई और लिखित आवेदन सौंपा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और नतीजा शून्य ही रहा।
चुनाव में पक्के मकान के वादे, जीत के बाद सुध लेने वाला कोई नहीं
इस पूरे मामले में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि चुनाव के दौरान आरंग विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने वादा किया था कि सरकार बनते ही सभी बेघरों को प्राथमिकता के आधार पर पक्का मकान दिया जाएगा, परंतु चुनाव जीतने के बाद न तो जनप्रतिनिधि दोबारा हालचाल जानने पहुंचे और न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इन परिवारों की सुध ली।

पीड़ित परिवार उठा रहे ये सवाल

  • दोहरा मापदंड क्यों..? यदि भांडदेवल मंदिर से बिल्कुल सटकर पक्के मकान बन सकते हैं तो 100 मीटर दूर रहने वाले 25-30 गरीब परिवारों का आवास क्यों रोका गया..?
  • किसके लिए हैं नियम..? क्या भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) और नगर पालिका के नियम आम गरीबों और रसूखदारों के लिए अलग-अलग हैं..?
  • हादसे का जिम्मेदार कौन..? यदि लगातार हो रही बारिश से जर्जर कच्चा मकान गिरने से कोई जनहानि होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—नगर पालिका प्रशासन की या क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की..?

पुरातात्विक नियमों का मनमाना हवाला देकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि धरातल पर साफ तौर पर भेदभाव और उपेक्षा नजर आ रही है।

पीएम आवास योजना से पात्र परिवारों को वंचित नहीं होने देंगे : सीएमओ
इस मामले में आरंग नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम संजीवन सोनवानी का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना से पात्र परिवारों को वंचित नहीं किया जा सकता। वैध दस्तावेज के बाद भी अगर आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा तो इसके कारणों की जांच की जाएगी। साथ ही पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से बातचीत करके समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके।

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