- 25 अक्टूबर को रायपुर में होगा अलंकरण समारोह, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के विचारों और सेवा कार्यों को किया जाएगा स्मरण
रायपुर (विश्व परिवार)। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आध्यात्मिक, साहित्यिक एवं सामाजिक अवदानों को स्मरण करते हुए स्थापित ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ से इस वर्ष दयोदय महासंघ, भोपाल को सम्मानित किया जाएगा। जीवदया, गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए महासंघ का चयन किया गया है। अलंकरण समारोह 25 अक्टूबर 2026 को रायपुर में आयोजित किया जाएगा।
‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ की स्थापना आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संस्कृतिशासनाचार्य स्वर्णिम पदारोहण के अवसर पर संस्कारधानी जबलपुर में की गई थी। वर्ष 2023 से प्रदान किए जा रहे इस अलंकरण का उद्देश्य आचार्य श्री के पवित्र विचारों को अपने कार्यों के माध्यम से साकार करने वाले महानुभावों एवं संस्थाओं का सम्मान करना है। वर्ष 2024 का अलंकरण परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद तथा संतों के पावन सानिध्य में प्रदान किया गया था।
आचार्य श्री विद्यासागर जी का जीवन मानवता के लिए प्रेरणास्रोत
ज्ञान, तप, वैराग्य एवं करुणा के प्रतीक आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज ने भारतीय अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्र-चिंतन को नई दिशा प्रदान की। वे कठोर तपस्वी होने के साथ-साथ उच्चकोटि के दार्शनिक एवं कालजयी महाकवि भी थे। उनकी अनुपम कृति ‘मूकमाटी’ विश्व-साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती है, जिसमें चेतना की आध्यात्मिक विकास-यात्रा का गहन चित्रण मिलता है।
आचार्य श्री ने आध्यात्मिक साधना के साथ समाज एवं राष्ट्र के उत्थान के लिए अनेक प्रेरणादायी कार्यों की दिशा प्रशस्त की। मूक जीवों की रक्षा के लिए दयोदय गोशाला महासंघ की स्थापना, युवाओं एवं महिलाओं के स्वावलंबन के लिए अहिंसक वस्त्र निर्माण, जेलों में बंदियों के परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के प्रयास तथा बालिकाओं को संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने जैसी पहलें उनके करुणामय चिंतन को प्रतिबिंबित करती हैं। चिकित्सा, आयुर्वेद, तीर्थ संरक्षण और जैन संस्कृति के संवर्धन के क्षेत्र में भी उनके विचारों से समाज को प्रेरणा मिली।
दयोदय महासंघ का जीवदया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
दयोदय महासंघ, भोपाल जीवदया, गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय संस्था है। महासंघ का प्रमुख कार्य असहाय एवं निराश्रित गोवंश को कसाईखानों के चंगुल से मुक्त कराकर सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना तथा उनके समुचित पालन-पोषण की व्यवस्था करना है।
संस्था मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित गोशालाओं के प्रभावी प्रबंधन और समन्वय में योगदान देती है। चारे-पानी की व्यवस्था, आधुनिक पशु चिकित्सालयों का संचालन तथा संकट के समय घायल एवं असहाय पशुओं के लिए चिकित्सा शिविर आयोजित करना इसके प्रमुख कार्यों में शामिल है।
महासंघ गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचगव्य, जैविक खाद और गो-उत्पादों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य करता है। संस्था के इन प्रयासों में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के करुणा, अहिंसा और जीवमात्र के प्रति संवेदनशीलता के संदेश की झलक दिखाई देती है।
जीवदया, प्राणी-रक्षण और मानवीय संवेदनाओं के प्रति समर्पण को सम्मानित करने वाला यह अलंकरण आचार्य श्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। समारोह का आयोजन विद्यासागरोदय (विद्यामतन) समाधि स्मारक समिति, चंद्रगिरि तीर्थक्षेत्र, डोंगरगढ़ से संबंधित समिति द्वारा किया जा रहा है।







