धर्म

अकलतरा में तमिल जैन संस्कृति और इतिहास पर बनी फिल्म का प्रदर्शन, बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल

अकलतरा (विश्व परिवार)। नगर के जैन भवन में जैन समाज द्वारा निर्यापक श्रमण श्री 108 प्रसाद सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 शीतल सागर महाराज के मंगल सान्निध्य में तमिल जैन संस्कृति एवं इतिहास पर आधारित विशेष फिल्म का प्रदर्शन किया गया, शाम 6 बजकर 30 मिनट से प्रोजेक्टर के माध्यम से आयोजित इस विशेष फिल्म प्रसारण कार्यक्रम में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बिलासपुर संभाग के आयुक्त सुनील जैन एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार पंकज कुमार जैन विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ जैन पाठशाला के बच्चों द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण एवं स्वागत गीत से हुआ। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना दिया।
तमिलनाडु की जैन विरासत को फिल्म के माध्यम से किया प्रस्तुत –
विशेष रूप से प्रदर्शित की गई तमिल जैन फिल्म में तमिलनाडु में जैन धर्म के प्राचीन इतिहास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, जैन मुनियों एवं अनुयायियों के योगदान तथा विभिन्न कालखंडों में जैन समाज द्वारा किए गए संघर्षों को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। फिल्म के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया कि दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु की धरती पर जैन धर्म की परंपरा कितनी प्राचीन और समृद्ध रही है।
फिल्म में जैन धर्म की पूर्व की स्थिति से लेकर वर्तमान समय तक की यात्रा, प्राचीन जैन स्मारकों, धार्मिक स्थलों, संस्कृति, परंपराओं तथा जैन समाज के संरक्षण एवं अस्तित्व के लिए किए गए प्रयासों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इतिहास और संस्कृति पर आधारित इस फिल्म ने उपस्थित समाजजनों को जैन धर्म की व्यापक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने का अवसर प्रदान किया।

मुनिश्री ने बताया जैन धर्म का प्राचीन इतिहास –
फिल्म प्रदर्शन के दौरान निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज ने तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत में जैन धर्म के प्राचीन इतिहास और उसके प्रभाव के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की, उन्होंने जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं, संस्कृति एवं आध्यात्मिक विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म का इतिहास केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में जैन धर्म ने ज्ञान, अहिंसा, तप, त्याग और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुनिश्री ने जैन समाज से अपनी प्राचीन विरासत, इतिहास एवं संस्कृति को जानने तथा उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इतिहास को जानना केवल अतीत की जानकारी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उससे प्रेरणा लेकर वर्तमान को मजबूत करना और भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ना भी है।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का प्रयास –
कार्यक्रम के आयोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जैन समाज की युवा पीढ़ी एवं बच्चों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में जैन धर्म की प्राचीन उपस्थिति और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना भी रहा। सामान्यतः दक्षिण भारत के जैन इतिहास के संबंध में लोगों को सीमित जानकारी होती है, ऐसे में डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से ऐतिहासिक तथ्यों एवं जैन संस्कृति को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
फिल्म के दृश्यों एवं ऐतिहासिक जानकारी के माध्यम से उपस्थित लोगों ने तमिलनाडु की जैन विरासत को करीब से देखा और समझा। इस दौरान कई समाजजनों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के ऐतिहासिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित –
जैन भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जैन समाज के महिला-पुरुषों, युवाओं एवं बच्चों सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जैन धर्म के इतिहास एवं संस्कृति को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला, श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के सान्निध्य में आयोजित इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का लाभ लिया।
कार्यक्रम ने जहां उपस्थित समाजजनों को तमिलनाडु की प्राचीन जैन विरासत से परिचित कराया, वहीं धर्म, इतिहास, संस्कृति और नई पीढ़ी के बीच जुड़ाव मजबूत करने की दिशा में भी एक सार्थक पहल के रूप में अपनी छाप छोड़ी ।

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