धर्म

मालवीय रोड दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में संस्कार शिविर के दूसरे दिन बही ज्ञान और धर्म की त्रिवेणी

  • नन्हे युवान जैन ने ली शांतिधारा की बोली, बच्चों में दान और समर्पण के संस्कार जागृत। बच्चों ने सीखी ‘बाल बोध’ की शिक्षा, बड़ों ने किया ‘छहढाला’ और ‘इष्टोपदेश’ का स्वाध्याय

रायपुर (विश्व परिवार)। मालवीय रोड स्थित ऐतिहासिक श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ) में आयोजित 10 दिवसीय ‘ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ का दूसरा दिन आध्यात्मिक, धर्ममय और अत्यंत ज्ञानवर्धक वातावरण में संपन्न हुआ। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा और श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में चल रहे इस शिविर को लेकर जैन समाज में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। आज नन्हे युवान जैन को मिला शांतिधारा का सौभाग्य और आन्वी को शांतिधारा वाचन का अवसर प्राप्त हुआ।
शिविर के दूसरे दिन का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह था, जब बच्चों में बचपन से ही दान, त्याग और धर्म के प्रति समर्पण के संस्कार जागृत करने के उद्देश्य से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसके तहत प्रभु की शांतिधारा हेतु श्रावकों के बीच मंगल भावना से बोली लगवाई गई। इस दौरान नन्हे बालक युवान जैन ने परम उत्साह के साथ बोली लगाकर देव-शास्त्र-गुरु के सानिध्य में अभिषेक एवं विश्व-शांतिधारा करने का परम सौभाग्य प्राप्त किया। एक छोटे बच्चे के भीतर दान और धर्म के प्रति ऐसा झुकाव देखकर उपस्थित समस्त समाज जनों का हृदय वात्सल्य से भर गया।

शिविर के द्वितीय दिवस के अध्ययन सत्र को दो अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर ख्यातिलब्ध विद्वानों द्वारा अत्यंत सरल और सुबोध भाषा में शिक्षण दिया गया। शिविर में आए नन्हे-मुन्ने बच्चों को ‘बाल बोध भाग–1’ एवं ‘भाग–2’ का गहन अध्ययन कराया गया। खेल-खेल में दी गई इस शिक्षा के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म के मूलभूत सिद्धांतों, सदाचार और दैनिक जीवन के नैतिक मूल्यों व संस्कारों से परिचित कराया गया। बड़ों का स्वाध्याय महिलाओं और युवाओं के वर्ग में प्रसिद्ध जैन ग्रंथों का स्वाध्याय कराया गया। आज विद्वानों द्वारा ‘छहढाला’ की द्वितीय ढाल के गूढ़ रहस्यों को समझाया गया और साथ ही ‘इष्टोपदेश’ ग्रंथ की सूक्तियों का वाचन कर आत्म-कल्याण और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त किया गया। साथ ही संस्था और ट्रस्ट की ओर से शिविर में प्रतिदिन सम्मिलित होने वाले सभी नन्हे बच्चों एवं प्रबुद्ध शिविरार्थियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए शिक्षण सत्र के उपरांत शुद्ध और सात्विक स्वल्पाहार (नाश्ते) की सुंदर व्यवस्था की गई। शिविर के दूसरे दिन भी सभी प्रतिभागियों ने पूरी ऊर्जा और भक्ति भाव के साथ प्रत्येक गतिविधि में हिस्सा लिया।

श्री दिगम्बर जैन पंचायत ट्रस्ट (कार्य समिति) एवं आदिनाथ विद्या धार्मिक पाठशाला के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से रायपुर के समस्त जैन परिवारों से अपील की है कि आज के इस आधुनिक और स्मार्टफोन के युग में बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का यह सर्वोत्तम अवसर है। जो परिवार या बच्चे किन्हीं कारणों से शुरुआती दो दिनों में शामिल नहीं हो सके हैं, वे कल सुबह से सपरिवार इस ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने अवश्य पधारें।

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