रायपुर (विश्व परिवार)। पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने रायपुर स्थित गुढ़ियारी ‘‘हमर अस्पताल’’ एवं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस काॅर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के वेयरहाउस तथा प्रदेश के विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में एक्सपायरी एवं निकट-एक्सपायरी दवाईयों के अवैध भंडारण, आपूर्ति, वितरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ सुनियोजित खिलवाड़, वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार, आपराधिक षड़यंत्र एवं दोषी अधिकारियों, आपूर्तिकर्ता कंपनियों, एजेंसियों तथा संबंधित व्यक्तियों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्यवाही किये जाने हेतु रायपुर संभाग आयुक्त को शिकायत पत्र सौंपा और तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित गुढ़ियारी क्षेत्र में संचालित ‘‘हमर अस्पताल’’ एवं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस काॅर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के वेयरहाउस में भारी मात्रा में एक्सपायरी तथा निकट-एक्सपायरी अवधि वाली औषधियों के पाए जाने संबंधी तथ्य अत्यंत गंभीर, भयावह एवं जनहित के प्रतिकूल परिस्थितियों को प्रदर्शित करते हैं। उक्त घटनाक्रम ने न केवल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरे संकट में डाल दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट संकेट दिया है कि स्वास्थ्य आपूर्ति प्रणाली में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, वित्तीय अनियमितता, आपराधिक मिलीभगत एवं जनस्वास्थ्य के साथ असंवेदनशील खिलवाड़ किया जा रहा है।
उपाध्याय ने बताया कि यह मामला सार्वजनिक निरीक्षणों एवं प्रत्यक्ष अवलोकनों सहित मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुढ़ियारी स्थित हमर अस्पताल परिसर, उससे संबंधित भंडारण स्थलों तथा सीजीएमएससी के वेयरहाउस में ऐसे औषधीय स्टॉक पाए गए हैं जिनकी वैधता अवधि समाप्ति के अत्यंत निकट है अथवा जिनकी एक्सपायरी अवधि संदिग्ध स्थिति में है। यह तथ्य अत्यंत चिंताजनक एवं मानव जीवन के लिए प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न करने वाला है कि उक्त दवाइयों में ऐसी औषधियां भी सम्मिलित बताई गई हैं जिनका उपयोग नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, वृद्धजनों, गंभीर रोगियों तथा पोषण एवं जीवनरक्षक उपचार हेतु किया जाता है। यदि ऐसी दवाइयां वास्तविक रूप से मरीजों को वितरित अथवा उपयोग हेतु उपलब्ध कराई गई हों, तो यह कृत्य न केवल प्रशासनिक विफलता है बल्कि भारतीय न्याय संहिता, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा लोक स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी विधिक प्रावधानों के अंतर्गत गंभीर आपराधिक अपराध की श्रेणी में आता है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि यह अत्यंत विचारणीय एवं संदेहास्पद परिस्थिति है कि राज्य शासन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से औषधियों की खरीदी किए जाने के बावजूद अस्पतालों में आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं का अभाव निरंतर बना रहता है, जबकि दूसरी ओर निकट-एक्सपायरी एवं संदिग्ध औषधियों का असामान्य भंडारण सामने आ रहा है। यह परिस्थिति प्रथम दृष्टया इस ओर संकेत करती है कि दवाइयों की खरीदी, सप्लाई, वितरण एवं स्टॉक प्रबंधन की संपूर्ण प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचार व्याप्त है। यह भी प्रतीत होता है कि शासकीय निविदा प्रक्रिया (Tender Process) को निष्पक्षता एवं पारदर्शिता से संचालित न कर कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों एवं एजेंसियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जा रहा है। यह तथ्य भी सार्वजनिक रूप से उठाया गया है कि कुछ दवा आपूर्तिकर्ता कंपनियों में प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों एवं उनके परिजनों की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भागीदारी है तथा शासन के प्रभाव का उपयोग कर सीजीएमएससी के माध्यम से उन कंपनियों को लाभकारी निविदाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यदि उक्त आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो यह स्थिति अत्यंत गंभीर आपराधिक षड्यंत्र, पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, लोकधन की हानि एवं जनविश्वास के घोर उल्लंघन का मामला सिद्ध होगी। यह भी जांच का विषय है कि क्या जानबूझकर कम अवधि वाली अथवा समाप्ति के निकट पहुंची दवाओं की खरीदी कर सरकारी अस्पतालों के माध्यम से उनका निस्तारण (Dumping) किया जा रहा था ताकि निजी कंपनियों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। इससे पूर्व भी सीजीएमएससी द्वारा आपूर्ति की गई हजारों यूनिट कैल्शियम दवाइयां खराब स्थिति में पाए जाने की घटनाएं सार्वजनिक रूप से सामने आ चुकी हैं। इसी प्रकार अस्पतालों में सप्लाई किए गए मेडिकल किट, सर्जिकल ग्लव्स, सिरिंज, सर्जिकल ब्लेड एवं अन्य चिकित्सकीय सामग्रियों की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठ चुके हैं। इन सतत घटनाओं से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि यह कोई आकस्मिक प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहे संगठित भ्रष्टाचार, गुणवत्ता नियंत्रण की विफलता एवं आपराधिक लापरवाही का परिणाम है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि एक्सपायरी अथवा निकट एक्सपायरी दवाओं का उपयोग नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, वृद्ध व्यक्तियों अथवा गंभीर रोगियों पर किया गया होगा, तो उसके दुष्परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते हैं। ऐसी दवाइयों से एलर्जिक रिएक्शन, विषाक्त प्रभाव, उपचार विफलता, संक्रमण, अंग-हानि, स्थायी स्वास्थ्य क्षति अथवा मृत्यु तक की संभावना उत्पन्न हो सकती है। यह परिस्थिति सीधे-सीधे संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त ‘‘जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार’’ का उल्लंघन है, क्योंकि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। पूर्व में भी विभिन्न अवसरों पर संबंधित जिला चिकित्सा अधिकारियों (DMO) एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को लिखित रूप से यह अवगत कराया गया था कि शासकीय अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाइयों की निरंतर भारी कमी बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर अनेक ऐसी दवाइयों एवं चिकित्सकीय सामग्रियों की अत्यधिक मात्रा में खरीदी की जा रही है जिनकी वास्तविक मांग नगण्य अथवा उपयोगिता सीमित है। बार-बार ध्यान आकर्षित कराए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा न तो आवश्यक दवाइयों की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित की गई और न ही अनावश्यक अथवा अनुपयोगी दवाइयों की अविवेकपूर्ण खरीदी पर रोक लगाई गई। परिणामस्वरूप भारी मात्रा में ऐसी दवाइयां शासकीय वेयरहाउसों एवं अस्पताल भंडारों में लंबे समय तक अनुपयोगी अवस्था में पड़ी रहीं तथा कालांतर में उनकी एक्सपायरी अवधि समाप्त हो गई। उक्त परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि औषधि खरीदी एवं वितरण प्रणाली में योजनाबद्ध वित्तीय अनियमितता, लापरवाही, कुप्रबंधन एवं संभावित भ्रष्टाचार व्याप्त है। आवश्यक दवाइयों की समय पर खरीदी न होने के कारण जहां एक ओर मरीजों को उपचार हेतु जरूरी औषधियां उपलब्ध नहीं हो सकीं, वहीं दूसरी ओर अनुपयोगी एवं गैर-आवश्यक दवाइयों की अत्यधिक खरीदी एवं उनके एक्सपायर हो जाने से शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हुई है, जो अंततः सार्वजनिक धन के दुरुपयोग एवं राजकोषीय हानि का गंभीर उदाहरण है। यह संपूर्ण घटनाक्रम प्रथम दृष्टया संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों की जवाबदेही, कार्यप्रणाली एवं वित्तीय निर्णयों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को और अधिक अनिवार्य बनाता है। उपाध्याय ने कहा यदि समय रहते कठोर वैधानिक एवं दण्डात्मक कार्यवाही नहीं की गई, तो प्रदेश की जनता का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था एवं शासन-प्रशासन से विश्वास समाप्त हो जाएगा तथा भविष्य में और भी बड़े जनस्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
इसलिये विकास उपाध्याय सहित कांग्रेसजनों ने मांग की है कि रायपुर स्थित हमर अस्पताल, सीजीएमएससी वेयरहाउस एवं प्रदेश के समस्त शासकीय अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप स्वास्थ्य केन्द्रों तथा औषधि भंडारण स्थलों में उपलब्ध दवाइयों का स्वतंत्र उच्चस्तरीय विशेष ऑडिट एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए, जिसमें औषधि विशेषज्ञ, ड्रग इंस्पेक्टर, वित्तीय ऑडिटर एवं स्वतंत्र तकनीकी टीम सम्मिलित हों। साथ ही संपूर्ण औषधि स्टॉक का बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, सप्लायर विवरण, निविदा दस्तावेज, परिवहन रिकॉर्ड, भंडारण रजिस्टर एवं वितरण अभिलेख जब्त कर फोरेंसिक एवं तकनीकी परीक्षण कराया जाए। संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, दवा आपूर्तिकर्ता कंपनियों, निविदा एजेंसियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, Drugs and Cosmetics Act. Essential Commodities Act तथा अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच प्रारंभ की जाए। जांच प्रभावित न हो इसके लिए संबंधित वेयरहाउस, रिकॉर्ड कक्ष एवं औषधि भंडार को तत्काल सील कर स्वतंत्र अभिरक्षा में लिया जाए तथा डिजिटल एवं भौतिक रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जाए तथा जांच पूर्ण होने तक उन्हें संवेदनशील पदों से पृथक रखा जाए। जिन मरीजों को उक्त संदिग्ध दवाइयों का वितरण किया गया हो उनकी पहचान कर चिकित्सकीय परीक्षण एवं स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि किसी संभावित दुष्प्रभाव की स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित कर संपूर्ण प्रकरण की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु दवा खरीदी, गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण एवं वितरण प्रणाली को पूर्णतः डिजिटलाइज्ड, पारदर्शी एवं सार्वजनिक निगरानी के अधीन किया जाए। मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि करोड़ों नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य, विश्वास एवं संवैधानिक अधिकारों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर विषय है। उपरोक्त प्रकरण में त्वरित, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित कर दोषियों के विरुद्ध उदाहरणात्मक दण्डात्मक कार्रवाई की जाए, जिससे जनता के जीवन एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके तथा शासन व्यवस्था में जनविश्वास पुर्नस्थापित हो। आज विकास उपाध्याय के साथ कांग्रेसजनों में मनीराम साहू, प्रकाश जगत, देवेन्द्र यादव, संदीप शर्मा, राजेश पाल, शिव श्याम शुक्ला, सोहन शर्मा, विकास अग्रवाल,अभय ठाकुर, वेद प्रकाश कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।







