रायपुर (विश्व परिवार)। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन तथा कृषि महाविद्यालय, रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे की प्रेरणा से कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों के क्षेत्र में एक विशिष्ट व्याख्यानमाला (Lecture Series) का शुभारंभ किया गया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों में शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार, व्यावसायिक विकास तथा बौद्धिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।
इस व्याख्यानमाला के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों, उद्योग विशेषज्ञों तथा विशिष्ट पेशेवरों को आमंत्रित किया जाएगा, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन विशेषज्ञों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों को कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में उभरती प्रवृत्तियों, समकालीन चुनौतियों, तकनीकी प्रगति, अनुसंधान अवसरों तथा कैरियर संभावनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
मासिक शैक्षणिक कार्यक्रम के रूप में परिकल्पित यह व्याख्यानमाला ज्ञान-विनिमय, विचारों के आदान-प्रदान, अंतर्विषयक शिक्षण तथा विशेषज्ञों एवं शैक्षणिक समुदाय के मध्य सार्थक संवाद का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। यह पहल विद्यार्थियों एवं युवा शोधकर्ताओं को शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता एवं विस्तार गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगी तथा कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं वैश्विक विकास के प्रति उनकी समझ को और अधिक व्यापक बनाएगी।
इसी श्रृंखला के अंतर्गत कृषि महाविद्यालय, रायपुर के सेमिनार हॉल में दिनांक 24 जून 2026 को अपराह्न 04:00 बजे प्रथम व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, पीएच.डी. शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. एम.पी. ठाकुर, प्रोफेसर एवं नोडल अधिकारी (आईसीएआर-एनआईआरएफ), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने “पीजी एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों का सशक्तिकरण : अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार, उद्यमिता एवं वैश्विक फसल स्वास्थ्य प्रबंधन की रूपरेखा” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।
अपने उद्बोधन में डॉ. ठाकुर ने वैज्ञानिक नवाचार, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, उद्यमिता तथा प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के माध्यम से भारतीय कृषि के रूपांतरण में युवा शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध ज्ञान एवं अनुसंधान को प्रभावी नवाचारों, पेटेंट, स्टार्टअप तथा सतत कृषि प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान करने, प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन हेतु प्रयास करने तथा बहुविषयक अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. ठाकुर ने कृषि शिक्षा के बदलते वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) के मध्य स्थापित शैक्षणिक सहयोग के अंतर्गत उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने संयुक्त स्नातक कार्यक्रमों, एकीकृत स्नातकोत्तर कार्यक्रमों तथा द्वैध डिग्री (Dual Degree) शोध कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इन कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा, उन्नत अनुसंधान सुविधाओं तथा अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप का लाभ प्राप्त हो सकता है। साथ ही उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध छात्रवृत्तियों एवं शुल्क रियायतों की भी जानकारी साझा की।

व्याख्यान के दौरान डॉ. ठाकुर ने विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों एवं प्राध्यापकों के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों, फेलोशिप तथा अनुसंधान अनुदानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने प्रतिभागियों को आईसीएआर पुरस्कारों, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप तथा अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक सम्मान योजनाओं में आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे उनके कैरियर विकास एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई दिशा मिल सके।
व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण भाग पादप रोग विज्ञान (Plant Pathology) एवं संबद्ध विषयों में कैरियर विकास पर केंद्रित था। डॉ. ठाकुर ने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, शासकीय विभागों, कृषि व्यवसाय उद्योगों, बीज कंपनियों, रोग निदान प्रयोगशालाओं, विस्तार सेवाओं तथा उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध विविध रोजगार अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने भविष्य की कृषि में डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोग पूर्वानुमान प्रणाली, सटीक कृषि (Precision Farming) तथा जैविक फसल संरक्षण तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर विशेष बल दिया।
छत्तीसगढ़ में पादप रोग विज्ञान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने रोग सर्वेक्षण, रोग निदान, धान रोग प्रबंधन, बीज स्वास्थ्य परीक्षण, जैविक नियंत्रण तकनीकों तथा कृषक-केंद्रित विस्तार गतिविधियों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उपलब्धियों ने राज्य में फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा सतत कृषि को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सतत फसल स्वास्थ्य प्रबंधन की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए डॉ. ठाकुर ने राज्य स्तरीय रोग निगरानी नेटवर्क की स्थापना, आणविक निदान प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, जलवायु-अनुकूल रोग प्रबंधन रणनीतियों के विकास तथा जैविक नियंत्रण तकनीकों के प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रोगों की त्वरित पहचान एवं किसानों को समयबद्ध सलाह उपलब्ध कराने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन तथा मोबाइल-आधारित परामर्श प्रणालियों के उपयोग की भी वकालत की।
व्याख्यान के पश्चात आयोजित संवादात्मक चर्चा सत्र में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने अनुसंधान अवसरों, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा कृषि क्षेत्र की भावी चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय, रायपुर के प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। यह आयोजन युवा शोधकर्ताओं को उत्कृष्टता, नवाचार एवं सतत कृषि विकास की दिशा में प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक मंच सिद्ध हुआ।







