मांगूर (विश्व परिवार)| अभिजीत इंग्रोळे, मांगूर ने बताया की पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराजजी का प्रथम पट्टाचार्य दिवस मांगूर में मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज , मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज जी के सानिध्य में मनाया गया |
आचार्य श्री विरागसागर महाराज जी के सुशिष्य, आध्यात्म योगी, चर्या शिरोमणी, वितरागी श्रमण – संस्कृति के आध्यात्मिक सद्गुरू दिगंबराचार्य का नाम है – श्री विशुद्धसागरजी महाराज |
भारत कि पावन वसुंधरा पर अनेकों ऋषी मुनीयों ने अपनी पवन चरण धुलि से इस वसुमती को परम पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान कि है | इसी शृंखला में इक्कीसवीं सदी के एक दूर – दृष्टा, युवाओं के प्रेरणा पुंज, आगमनुसार आचरण कर के जन – जन को सद् – बोध देने वाले आध्यात्मिक गुरू पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज द्वारा वर्तमान में कि गई धर्मप्रभावना समाज के समक्ष उपस्थित है | सत्य,अहिंसा, मैत्री, जियो और जिने दो के साथ आचार्य विरागसागर महाराज जी के चमकते सितारे आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी का मुख्य नारा नमोस्तु शासन जयवंत हो है |
चर्या शिरोमणी आचार्य भगवन श्री विशुद्धसागर जी महाराज का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड में 18 दिसम्बर 1971 को हुआ | आपका गृहग्राम रूर है, जहाँ आपकी प्राथमिक शिक्षा दसवीं तक संपन्न हुई थी |
क्षुल्लक दीक्षा-
राजेंद्र (लला) ने आचार्य विराग सागर महाराज जी के कर कमलो से दिनांक ११ अक्टूबर १९८९ को भिंड में भव्य क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण की। उनका नाम रखा गया क्षुल्लक श्री यशोधर सागर जी | इस समय इनकी आयु १८ वर्ष की थी।
ऐलक दीक्षा- परम पूज्य क्षुल्लक श्री यशोधर सागर जी ने आचार्य विराग सागर महाराज जी के कर कमलो से २ वर्ष बाद दिनांक १९ जून १९९१ को भव्य ऐलक दीक्षा पन्ना नगर में ग्रहण की |
मुनि दीक्षा – ऐलक दीक्षा के ६ माह बाद ही परम पूज्य ऐलक श्री यशोधर सागर महाराज जी ने २० वर्ष की आयु में अपने गुरुवर आचार्य श्री विराग सागर महाराज से श्रेयांस गिरी में दिनांक २१-११-१९९१ को भव्य मुनि दीक्षा ग्रहण की | और नाम रखा गया मुनि श्री १०८ विशुद्धसागर जी महाराज ।
आचार्य पदारोहण – परम पूज्य आचार्य श्री विरागसागर महाराज जी ने आपकी योग्यता को परखकर औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में दिनांक ३१ मार्च २००७ को महावीर जयंती के पावन दिवस पर विशुद्धसागर महाराज जी को परम पूज्य आचार्य श्री विराग सागर जी के कर कमलो से आचार्य पद प्रदान किया | मुनि दीक्षा के १५ वर्ष ६ माह बाद ३५ वर्ष की आयु में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।







