रायपुर (विश्व परिवार)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के इंस्टीट्यूट रिसर्च सेल की ओर से स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय ‘अनुसंधान अभिमुखीकरण कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को शोध पद्धति, अकादमिक लेखन, अनुसंधान नैतिकता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की जानकारी देकर गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए तैयार करना था।
कार्यशाला में शोध के विभिन्न चरणों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें शोध विषय का चयन, शोध प्रश्न तैयार करना, थीसिस प्रोटोकॉल बनाना, डेटा विश्लेषण, परिणामों की व्याख्या और शोध पत्र तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। साथ ही शोध में ईमानदारी, चिकित्सा नैतिकता, संदर्भ प्रबंधन और अकादमिक प्रकाशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर भी जानकारी दी गई।
उद्घाटन सत्र में डॉ. एकता खंडेलवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी। डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा ने स्नातकोत्तर शिक्षा में अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. एली महापात्रा ने थीसिस प्रोटोकॉल तैयार करने से जुड़े दिशा-निर्देश बताए। इस अवसर पर एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने विद्यार्थियों में अनुसंधान की संस्कृति विकसित करने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
शोध पद्धति और डेटा विश्लेषण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों ने शोध विषय और शीर्षक का चयन, वैज्ञानिक साहित्य की खोज, साहित्य समीक्षा, रिसर्च गैप की पहचान, शोध प्रश्न, परिकल्पना और अध्ययन के उद्देश्यों जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए। इसके अलावा विभिन्न शोध डिजाइनों और डेटा संग्रह के उपकरणों की जानकारी भी दी गई।
भोजनावकाश के बाद सांख्यिकीय परीक्षण, डेटा विश्लेषण, सैंपल साइज की गणना, रोगों की आवृत्ति मापने के तरीके और डेटा के प्रकारों पर सत्र आयोजित किए गए। प्रश्नावली, केस रिकॉर्ड फॉर्म, प्रतिभागी सूचना पत्र और सहमति पत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। दिन के अंतिम सत्र में डॉ. निघात हुसैन ने ‘डिग्री से आगे: एक पूर्ण एवं सक्षम रेजिडेंट का निर्माण’ विषय पर व्याख्यान देते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत विकास के महत्व को बताया।
शोध में AI के उपयोग और नैतिकता पर हुई चर्चा
कार्यशाला के दूसरे दिन शोध में साहित्यिक चोरी, अकादमिक ईमानदारी, संदर्भ प्रबंधन और शोध पत्रों में उचित संदर्भ देने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। डॉ. रोशन मैथ्यू ने अनुसंधान और थीसिस के प्रकाशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की भूमिका और संभावनाओं की जानकारी दी।
इसके बाद शोध सिनॉप्सिस लिखने, चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता और संबंधित दिशा-निर्देशों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। डॉ. मृत्युंजय राठौर ने शैक्षणिक पाठ्यक्रम के दौरान तनाव प्रबंधन के उपयोगी तरीके बताए। वक्ताओं ने कहा कि अकादमिक उत्कृष्टता के साथ नैतिक आचरण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
कार्यशाला के समापन पर प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इसमें कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), डॉ. एली महापात्रा, डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा और इंस्टीट्यूट रिसर्च सेल के सदस्य उपस्थित रहे। इस दौरान कार्यशाला का सारांश प्रस्तुत किया गया और प्रतिभागियों से प्रतिक्रिया ली गई। डॉ. गौरव सूर्यवंशी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को अनुसंधान की पूरी प्रक्रिया को समझने और उसे व्यावहारिक रूप से लागू करने का अवसर मिला। एम्स रायपुर का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के जरिए चिकित्सा शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित अकादमिक कार्य संस्कृति को मजबूत करना है, ताकि विद्यार्थी स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा विज्ञान के विकास में योगदान दे सकें।







