रायपुर (विश्व परिवार)। पंचशील नगर निवासी एवं “तपस्वी रत्न” सुश्रावक श्री विजय संचेती ने नेपाल केसरी, राष्ट्र संत परम पूज्य गुरुदेव श्री मणिभद्र मुनि जी के आशीर्वाद से एक माह का निराहार उपवास मासखमन आज पूर्ण किया। उनके इस कठिन तप की निरंतरता और साधना के प्रति समर्पण ने समाज के लोगों को प्रेरित किया है।
विदित हो कि श्री विजय संचेती विगत 32 वर्षों से लगातार मासखमन की तपस्या करते आ रहे हैं। इस वर्ष उनका यह 33वां मासखमन है। जैन समाज में मासखमन को अत्यंत कठिन एवं विशिष्ट तपस्या माना जाता है। इसमें साधक पूरे एक माह तक अन्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों का पूर्ण त्याग करते हुए केवल गरम जल का सेवन कर निराहार उपवास करता है।
समाज के वरिष्ठ सदस्य श्री विनय पटवा ने बताया कि लगातार 33 वर्षों से इस प्रकार की कठोर तपस्या करना अपने आप में एक असाधारण आध्यात्मिक उपलब्धि है। श्री संचेती की तपस्या धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था, आत्मसंयम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचायक है। उन्होंने कहा कि उनकी इस साधना से समाज के अन्य लोगों को भी संयम, त्याग और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा मिलती है । श्री पटवा ने आगे बताया कि 33वें मासखमन का पारणा कुम्हारी स्थित जैन तीर्थ कैवल्य धाम में “बस्तर प्रहरी” परम पूज्य श्री राजेश श्री जी म. सा. आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। पारणा का कार्यक्रम प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे के मध्य हुआ। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहकर तपस्वी श्री विजय संचेती का अभिनंदन तथा उनके तप की अनुमोदना की।







