रायपुर (विश्व परिवार)। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “कंटीन्यूअस्ली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन नेटवर्क के माध्यम से प्रिसीजन पोजिशनिंग सेवाएं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक वैश्विक पोजिशनिंग प्रणाली की सीमाओं को दूर कर अत्याधुनिक CORS तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना रहा, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की योजना, सर्वेक्षण और निर्माण को अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी बनाया जा सके।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि CORS तकनीक के उपयोग से राजमार्ग निर्माण प्रक्रिया में आधुनिकता और गुणवत्ता का नया अध्याय जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि रीयल-टाइम डेटा आधारित यह प्रणाली इंजीनियरों और ठेकेदारों को सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगी, जिससे कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और वैश्विक मानकों के अनुरूप परिणाम सुनिश्चित होंगे।
तकनीकी सत्र में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण सर्वेक्षक (प्रभारी, छत्तीसगढ़) राजेश रंजन ने बताया कि CORS नेटवर्क एक उन्नत बुनियादी ढांचा प्रणाली है, जो देशभर में अत्यंत सटीक स्थान-निर्धारण सेवाएं प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इसके उपयोग से जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में भी त्रुटिहीन डिजिटल मैपिंग और डेटा संग्रहण संभव होगा, जिससे अवसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
WFM6.jpeg)
इस अवसर पर विभाग के आधिकारिक सर्वेयर प्रभात कुमार प्रधान ने कहा कि CORS तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण और निर्माण कार्यों में सेंटीमीटर स्तर तक की सटीकता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली न केवल रीयल-टाइम मॉनिटरिंग को सशक्त बनाती है, बल्कि परियोजनाओं की समय-सीमा और लागत में भी उल्लेखनीय बचत सुनिश्चित करती है।
कार्यशाला में परियोजना निदेशक डी.डी. पार्लावार, दिग्विजय सिंह, मुकेश कुमार तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के कार्यपालन अभियंता रामवीर यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।







