केकड़ी (विश्व परिवार)। अद्भुत प्रतिभा के धनी डॉक्टर पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री उत्तरप्रदेश के ललितपुर-झांसी जिले के नादेल बानपुर ग्राम में वैद्य भरोसेलाल जी व माता छोटी बाई जैन के घर जन्मे। सात भाई-एक बहिन के परिवार में पले-बढ़े शास्त्री जी शुरू से सरल, मधुर वाणी व हँसमुख स्वभाव के हैं। उन्होंने सम्पूर्ण जीवन जैन धर्म, संस्कृति व साहित्य को समर्पित कर दिया है। शास्त्रों के सिद्धहस्त होने के साथ वे सिद्धान्त ग्रन्थ, स्वाध्याय, तत्वचर्चा व सामाजिक निर्लोभ सेवा के मर्मज्ञ हैं।
कुशल पाण्डित्य:- उनकी ओजपूर्ण वाणी का श्रोताओं पर जादुई असर होता है। सरल भाषा में तीर्थंकर की अमृतवाणी सुनाकर वे भक्तों को झुमा देते हैं। निश्चयनय-व्यवहारनय का समन्वय उनके प्रवचनों की विशेषता है। श्री मंडल विधान, सहस्रनाम महामंडल विधान पंच कल्याणक महोत्सव महा महाआरती में शास्त्री जी श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबा देते हैं।
ज्योतिष, योग और वास्तुशास्त्र के ज्ञाता शास्त्री जी मंदिर, घर, दुकान के वास्तुदोष व शारीरिक पीड़ा के दोषों को योग से दूर करने का मार्गदर्शन देते हैं। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र केशवराय पाटन में भारत गौरव परम पूज्य गणिनी आर्यिका गुरु माँ स्वस्तिभूषण माता ससंघ के पावन सानिध्य में जैन विधि-विधान के मर्मज्ञ पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री, केकड़ी को अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् ने “विधानाचार्य” की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया है। यह सम्मान श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवराय पाटन में परिषद् अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन द्वारा प्रदान किया गया। उनियारा में समाज उन्हें “आध्यात्मिक पाणिनि” से भी नवाज चुका है।
परिषद् ने प्रमाणित किया कि शास्त्री जी ने विधि-विधान के विभिन्न पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण व 36 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया है। विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वर्तमान के श्रवण कुमार राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणी” पत्रकार कोटा ने जानकारी देते हुए बताया कि संपूर्ण भारत वर्ष में आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान विधानों में सकल दिगम्बर जैन समाज के द्वारा 47 उपाधियों से विभूषित किया जा चुका है। आप केकड़ी में 34 वर्ष निवासी कर रहे हैं अनेकों, अनेकों जगह धर्म प्रभावना करते आ रहे हैं। आपकी सबसे बड़ी ये विशेषता है कि जो भी आपसे एक बार संपर्क में आ जाता है वो जीवन में आपको कभी नहीं भूलता। मेरा भी सौभाग्य रहा जब मैं सपरिवार आपके घर आया था तब आपने जो आतिथ्य सत्कार किया वात्सल्य मय भोजन करवाया आपका प्यार प्रेम स्नेह आत्मीयता जीवन की अंतिम सांस तक ऐसी ही बनी रहे यही वीर प्रभु से कामना प्रार्थना करता हूं। आपका पूरा परिवार सद संस्कारों से युक्त है। आपने श्री दिगम्बर जैन गणेश प्रसाद वर्णी संस्कृत महाविद्यालय सिद्धक्षेत्र आहार जी टीकमगढ़ (म.प्र.) से अध्ययन किया है।आपने अमेरिका, चीन, बैंकॉक, नेपाल, भूटान थाईलैंड, दुबई, विदेशों ने जाकर भी बड़े बड़े आयोजनों विधानों को खूब संपन्न करवाया।







