नई दिल्ली (विश्व परिवार)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार भारत की विकास गति को बनाए रखने के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। साथ ही उन्होंने वित्तीय अनुशासन और समझदारी बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक विस्तार और कल्याणकारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हुए भी सार्वजनिक खर्च जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए। HSBC इंडिया के तीसरे वार्षिक ‘वित्तीय समावेशन सम्मेलन’ में HSBC इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत करते हुए सीतारमण ने ये बातें कहीं।
कैपेक्स का गुणक प्रभाव
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में पूंजीगत व्यय ने अपने ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ के जरिए अच्छे परिणाम दिए हैं। यह आगे भी सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। उन्होंने कहा, “कैपेक्स हमारी विकास रणनीति का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि निजी क्षेत्र के अपनी क्षमता बढ़ाने या नई क्षमताएं स्थापित करने के लिए आगे आने तक सरकार के लिए पूंजीगत व्यय को जारी रखना जरूरी है।”
सरकार निवेश जारी रखेगी ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे, लेकिन राजकोषीय घाटे पर भी कड़ी नजर रखेगी। उन्होंने जोर दिया, “हमें वित्तीय रूप से समझदारी बरतने की जरूरत है। वरना इसका कोई फायदा नहीं होगा।” प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वित्तीय समझदारी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
कल्याणकारी योजनाओं का असर
कल्याणकारी प्रतिबद्धताओं और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के बीच संतुलन पर बात करते हुए सीतारमण ने सरकारी योजनाओं की भूमिका रेखांकित की। इन योजनाओं ने खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने में मदद की है। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार भारत में गरीबी का स्तर जो कभी लगभग 25 प्रतिशत था, वह वित्त वर्ष 2023 के अंत तक घटकर मात्र 2 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने इस सुधार का श्रेय कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को दिया।
वित्तीय समावेशन का अगला चरण
वित्त मंत्री ने वित्तीय समावेशन के अगले चरण के लिए ऋण (क्रेडिट), बीमा और पेंशन को प्राथमिकता बताया। उन्होंने 2047 तक सभी के लिए बीमा कवरेज सुनिश्चित करने के लक्ष्य को दोहराया। जो लोग अपना व्यवसाय शुरू करना या बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए ऋण तक पहुंच बहुत महत्वपूर्ण है।
कौशल विकास और बैंकिंग सुधार
रोजगार और कौशल के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि हर जिले में एआई प्रशिक्षण देने वाले केंद्र हों, ताकि युवाओं को एआई-आधारित नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके और उद्योग की जरूरतों तथा ग्रेजुएट्स के कौशल के बीच का अंतर कम हो। उन्होंने हाल ही में घोषित उच्च-स्तरीय समिति का भी जिक्र किया, जो उद्योग और विशेषज्ञों से सलाह लेकर सुझाव देगी कि ‘विकसित भारत’ के विजन को पूरा करने के लिए भारत की बैंकिंग प्रणाली को किन चीजों की जरूरत है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार को विकास को बढ़ावा देने और सार्वजनिक खर्च को बनाए रखने के लिए नए तथा रचनात्मक तरीके खोजने होंगे, साथ ही वित्तीय रूप से सतर्क भी रहना होगा।







