• युवराज आदिकुमार की बारात झूमे श्रद्धालु
• राज्याभिषेक…वैराग्य…दीक्षा के पावन दृश्यों को देखकर भाव विभोर हुए श्रद्धालु
• भगवान ने राजपाट त्याग धारण की दिगंबर दीक्षा
झांसी (विश्व परिवार)। महानगर के मेडिकल कॉलेज गेट नं 3 से आगे स्थित भगवान महावीर महातीर्थ में राजकीय अतिथि भारत देश के सर्वमान्य दिगम्बराचार्य, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महामुनिराज (ससंघ) के मंगल सान्निध्य में आयोजित श्रीमज़्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रातःकाल की बेला में नित्य नियम अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन हुई।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए शताब्दी देशनाकार श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने कहा कि आत्म विश्वास, धैर्य, समर्पण से ही जीवन में ऊंचाइयां प्राप्त होती हैं। पुण्य के बिना कुछ भी पाना नामुमकिन हैं। विश्व में युद्ध चल रहे हैं और भारत में यज्ञ चल रहे हैं।
भारत पुण्य भूमि हैं। आत्मशांति के लिए अस्त शस्त्र नहीं बल्कि शास्त्र साधना चाहिए। साधना का क्षेत्र उत्कृष्ट हैं।
आराधक और साधक दोनों का अलग ही कार्यक्षेत्र हैं। आराधक भक्ति करता हैं और साधक साधना करता हैं।
सापेक्षता का सिद्धांत आइंस्टीन का नहीं बल्कि त्रिकालिक हैं। इसके पूर्व युवराज आदिकुमार के स्वरूप में देवराज चौधरी की बारात निकली। जिसमें तीर्थंकर के माता – पिता श्रीमती प्रभा – पदमचंद जैन मिठया, सौधर्म इन्द्र अंजली – डॉ राजीव जैन, धनपति कुबेर इन्द्र शिल्पी – राजीव जैन वर्धमान, मूर्ति पुण्यार्जक बीना – देवेन्द्र जैन काला, ध्वजारोहणकर्ता सरोज – शैलेन्द्र जैन, राजेन्द्र जैन, रितु – विकास जैन, केतन जैन, महायज्ञनायक रिद्धि – यश सिंघई, यज्ञनायक शर्मिला – पदमचंद जैन रानीपुर, विधिनायक प्रतिमा पुण्यार्जक मेघा – प्रदीप जैन, महरौनी, ईशान इन्द्र डॉ निकिता – डॉ संदीप जैन, माहेन्द्र इन्द्र सोनिया – अभिजीत जैन रतनसेल्स, राजा श्रेयांश जूली – जिनेन्द्र जैन, राजा सोम रुचि – डॉ निर्देश जैन, मण्डप उद्घाटनकर्ता अलका – डॉ पी.के. जैन, महामंडलेश्वर रश्मि – गौतम जैन, संध्या – इंजी. अरुण जैन दूरदर्शन, हेमा – डॉ अमित जैन, रश्मि – अनुराग जैन, ब्रह्म इंद्र कमला – विमल कुमार जैन, सौभाग्यवती महिला सीए रूपाली जैन, कल्पना जैन, मनीषा सिंघई, नेहा जैन, डॉ प्रीति जैन, श्वेता जैन, सुनीता शिवाजी, जूली मोदी सहित हजारों श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव पूर्वक नृत्य किया। बीते रात भगवान के बुआ – फूफा के स्वरूप में रश्मि – प्रभात जैन, नम्रता – ज्ञानेंद्र जैन ने काजल की रस्म अदा की। प्रथम पालना झुलाने का सौभाग्य जितेन्द्र जैन वर्धमान परिवार को प्राप्त हुआ।
प्रातः काल की धर्मसभा में आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य सुमतचंद जैन, विजय जैन,पदमचंद जैन, कमलेश जैन, पुष्पेंद्र जैन रानीपुर एवं शास्त्र भेंट शांतिधारा करने का सौभाग्य ऋषभ जैन स्वास्थ्य विभाग, बालचंद जैन, प्रवीण जैन दीनदयालनगर को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी झांसी महानगर के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह, उपाध्यक्ष अभिषेक जैन, पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ पी.के. जैन, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के मुख्य मार्गदर्शक अजित कुमार जैन, मुख्य संरक्षक ललित जैन, मुख्य सलाहकार डॉ जिनेन्द्र जैन, संरक्षक राजीव जैन सिर्स, वीरेन्द्र जैन (पूर्व वनाधिकारी), सुभाष जैन सत्यराज, रमेशचंद जैन अछरौनी, सुरेन्द्र सर्राफ, रविन्द्र सिंघई, जिनेन्द्र सर्राफ, राजेंद्र जैन प्रेस, अशोक जैन लाला, शांतकुमार जैन चैनू, मनोज अछरौनी, प्रदीप जैन चैनू, अनिल जैन बाजा, राजेंद्र जैन अछरौनी, रविन्द्र जैन चिरगांव, सुनील अछरौनी, पुष्पेंद्र जैन रानीपुर, राजीव ड्योढ़ीया, समन्वयक यूथप सर्राफ पिंकी, सनतकुमार जैन गुदरी, ऋषभ जैन स्वास्थ्य विभाग, राजेश जैन दीनदयालनगर, चक्रेश जैन कैलाश रेजिडेंसी, मनीष जैन चंदेरी, राजीव जैन शिवाजी, जितेन्द्र जैन सीपरी, संजीव जैन चिरगांव, पंचायत कोषाध्यक्ष जितेन्द्र चौधरी, ऑडिटर राजकुमार भण्डारी, बड़ा मन्दिर मंत्री सुनील जैनको, संयोजक आलोक जैन विश्वपरिवार, देवेश जैन केडी, नितिन जैन सदर, सनी जैन चैनू, सचिन सर्राफ, संयोग भण्डारी, अमन जैन विरागप्रिय, दीपांक सिंघई, सजल जैन चैनू, अंचल जैन लवी, आशीष जैन माची, अमित सिंघई, विशाल सिंघई, अलंकार जैन, शरद जैन चाचा, मनोज सिंघई, सौरभ जैन कटरा, दिव्यांश जैन, अंशुल जैन बघेरा, मुकेश जैन वीडियो, कमल शिवाजी, आशीष जैन नगरा, रवि जैन बिजौली, सुनील जैन गुदरी, विपिन जैन ओम बिजली, मुकेश जैन होजरी, प्रतीक जैन सदर, नीलेश जैन सागर गेट, जिनेन्द्र जैन राजहंस, आनंद जैन वारे, विकास जैन चिरगांव, जितेन्द्र जैन शामियाना, राजेन्द्र मुनीम, प्रबंधक आशीष जैन सोनू, सुरेन्द्र जैन बघेरा, श्रीमती सरोज जैन प्रेस, सुधा सर्राफ, रजनी जैनको, रीता जैन, संगीता जैन मॉम्स बेकरी, स्नेहलता जैन, ममता जैन, रितु जैन, वंदना चौधरी, संजना सर्राफ, सिद्धि जैन, आकृति जैन सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहें।
दीप प्रज्ज्वलन करके अतिथियों का स्वागत सत्कार अध्यक्ष शैलेन्द्र जैन प्रेस, कार्याध्यक्ष कैलाशचंद जैन वर्धमान, मुख्य संयोजक सिंघई संजय जैन, वरुण जैन, केतन जैन, मुख्य समन्वयक खुशाल जैन, स्वागताध्यक्ष रविन्द्र जैन रेल्वे, उपाध्यक्ष अतुल जैन सर, अंकित सर्राफ, वरिष्ठ महामंत्री दिनेश जैन डीके, डॉ राजीव जैन, महामंत्री सौरभ जैन सर्वज्ञ, मुख्य कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र जैन बक्सा, कोषाध्यक्ष देवेन्द्र जैन एलआईसी, कमलेश जैन रोहित गारमेंट्स, ऑडिटर प्रभात जैन कुंजबिहारी, संयोजक प्रदीप जैन वर्धमान, इंजी संजय जैन महोबा, प्रचार मंत्री एंजि अतिशय जैन ने किया।
• वैराग्य की भावना और लौकांतिक देवों द्वारा अनुमोदना:
दोपहर के सत्र में मुख्य मंच पर तप कल्याणक की मनोहारी नाटिका प्रस्तुत की गई। इसमें दर्शाया गया कि किस प्रकार तीर्थंकर भगवान को राजसी ठाठ-बाट, धन-संपदा और सांसारिक सुखों से विरक्ति (वैराग्य) हो जाती है। जब भगवान के मन में वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं, तब स्वर्ग से लौकांतिक देव आकर उनके इन भावों की स्तुति और अनुमोदना करते हैं।
• भव्य दीक्षा जुलूस और वन गमन:
वैराग्य के पश्चात भगवान अपना संपूर्ण राजपाट और सांसारिक जिम्मेदारियां सौंपकर तपस्या के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं। भगवान को एक अत्यंत सुसज्जित और भव्य पालकी (दीक्षा पालकी) में विराजमान कर वन की ओर ले जाया गया।
• केशलोंच और दिगंबर दीक्षा धारण:
तपोवन में पहुंचकर वह अत्यंत भावुक क्षण आया जब भगवान ने अपने सभी राजसी वस्त्रों और आभूषणों का त्याग कर दिया। उन्होंने अपने हाथों से ‘केशलोंच’ (बालों को उखाड़ना) किया और “ॐ नमः सिद्धेभ्यः” मंत्र का उच्चारण करते हुए निर्ग्रंथ दिगंबर मुनि दीक्षा धारण कर ली और आत्म-कल्याण के लिए घोर तपस्या में लीन हो गए। इस दृश्य ने वहां उपस्थित प्रत्येक दर्शक को वैराग्य और त्याग की महिमा से परिचित कराया।
इस अवसर पर आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महामुनिराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि देश का सम्राट, वैद्य और गुरु को भेदभाव नहीं करना चाहिए। यह भारत देश ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम से प्रख्यात हैं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश विधान परिषद् के माननीय सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह, नगर निगम की पूर्व उपसभापति प्रियंका – नितिन साहु, जिला उपाध्यक्ष मनु सिंह, अतुल जैन बंटी, देवेन्द्र दुबे आदि ने श्रीफल भेंट करके आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सायंकालीन महाआरती का सौभाग्य श्रीमति मेघा – प्रदीप जैन महरौनी, अनुश्री – दिव्यांश जैन, दीपांक सिंघई को प्राप्त हुआ। भरत – बाहुबली के रूप में ऋषभ जैन, प्रणव जैन ने संवाद किया।
कार्यक्रम का संपूर्ण संचालन महामंत्री सौरभ जैन सर्वज्ञ एवं आभार वरिष्ठ महामंत्री दिनेश जैन डीके ने व्यक्त किया।
16 मई को ज्ञान कल्याणक
महोत्सव समिति के महामंत्री सौरभ जैन सर्वज्ञ ने बताया कि तप कल्याणक के सफलता पूर्वक संपन्न होने के बाद, 16 मई को ‘ज्ञान कल्याणक’ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान को केवलज्ञान (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति का भव्य मंचन होगा और समवसरण की रचना की जाएगी, जहाँ भगवान की प्रथम दिव्य ध्वनि खिलेगी।








