रायपुर (विश्व परिवार) | छत्तीसगढ़ में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, गर्भावस्था के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं को कम करने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से SMC Group of Hospitals द्वारा राज्यस्तरीय सम्मेलन ‘हाई रिस्क प्रेग्नेंसी अपडेट 2026’ का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ में पहली बार इस विषय पर इस तरह का सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें पूरे प्रदेश से लगभग 150 स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को कम करने, गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं की समय पर पहचान करने और गर्भवती महिलाओं को उचित उपचार उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा करना था।
विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, एनीमिया और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी समस्याएं मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। नियमित जांच, समय पर जोखिम की पहचान, उचित उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी से इन जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गर्भावस्था की शुरुआत से ही महिलाओं की नियमित जांच की जाए, हाई रिस्क मामलों की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र में उपचार उपलब्ध कराया जाए। इससे सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत और छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु दर कम करना जरूरी
भारत में मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करना स्वास्थ्य सेवाओं की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। भारत की मातृ मृत्यु दर वर्ष 2020–22 में प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 88 थी। विशेषज्ञों के अनुसार, मातृ मृत्यु के लगभग 70 प्रतिशत मामले हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ में भी मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, हाई रिस्क मामलों की शीघ्र पहचान और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
देश के विशेषज्ञों ने साझा किए अपने अनुभव
सम्मेलन में अहमदाबाद से आए डॉ. नागोरी एवं डॉ. सोनल पांचाल तथा ग्वालियर से आईं डॉ. वीना अग्रवाल ने गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं और उनके बेहतर प्रबंधन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सकों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित एएनसी जांच, ब्लड प्रेशर की निगरानी, हीमोग्लोबिन एवं ब्लड शुगर की जांच और आवश्यक अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान होने वाले जोखिमों की पहचान की जा सकती है।
SMC Group of Hospitals द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सकों के बीच नवीनतम चिकित्सा जानकारी और अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना था।
सम्मेलन में डॉ. प्रज्ञा सूर्यवंशी, डॉ. ममता दास, डॉ. सतीश सूर्यवंशी, डॉ. एस. एस. मोहंती एवं डॉ. अजय चौरसिया सहित अन्य चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
SMC Group of Hospitals का उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय और बेहतर उपचार व्यवस्था के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व की सुविधा उपलब्ध कराने में योगदान देना है।
सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के जोखिम को कम करने के लिए जागरूकता, नियमित जांच, समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद जरूरी हैं। सामूहिक प्रयासों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और सुरक्षित मातृत्व के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।







