धर्म

मालवीय रोड जैन मंदिर में संस्कार शिविर का आधा सफर पूरा, बच्चों ने सीखा बड़ों का आदर करना व मोबाइल से दूरी बनाना

  • नन्हे अक्षत पाटोदी को मिला शांतिधारा का सौभाग्य, बच्चों को सिखाई गईं अभिषेक की पावन क्रियाएं
  • बड़ों की पाठशाला में हुआ ‘मिथ्यात्व’ का विवेचन, जयपुर और रायपुर के विद्वान दे रहे हैं प्रशिक्षण

रायपुर (विश्व परिवार)। मालवीय रोड स्थित ऐतिहासिक श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ) में चल रहे 10 दिवसीय ‘ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ के पांचवें दिन ज्ञान, वैराग्य और सदाचार की त्रिवेणी बही। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा और श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में बच्चे और बड़े दोनों ही उत्साहपूर्वक धर्म लाभ ले रहे हैं।

शिविर के पांचवें दिन प्रातः कालीन सत्र में बच्चों को जैन धर्म की मूलभूत और आवश्यक क्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया। सांगानेर से आए विद्वानों की देखरेख में बच्चों को विधि-विधान से अभिषेक एवं शांतिधारा करने की पावन क्रियाएं सिखाई गईं। आज देव-शास्त्र-गुरु के पावन सानिध्य में विश्व-शांतिधारा करने का सौभाग्य नन्हे बालक अक्षत पाटोदी को प्राप्त हुआ।

आज की विशेष कक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। विद्वानों द्वारा बच्चों को दैनिक जीवन में बड़ों का सम्मान करने, माता-पिता का कहना मानने, मोबाइल का कम से कम उपयोग करने और घर में आए अतिथियों का भारतीय संस्कृति के अनुसार आदर-सत्कार करने का संकल्प दिलाया गया। इसके साथ ही धार्मिक पाठ्यक्रम के अंतर्गत ‘जैन धर्म शिक्षा भाग-2’ के क्रमांक-4 के माध्यम से बच्चों को “कर्म” भाव के सिद्धांत को बहुत ही सरल ढंग से समझाया गया।

इसी क्रम में बड़ों और युवाओं के लिए आयोजित स्वाध्याय सत्र में प्रसिद्ध जैन ग्रंथ ‘छहढाला’ की दूसरी ढाल का अध्ययन कराया गया। आज विद्वानों ने “मिथ्यात्व का वर्णन” विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संसारी जीव किस प्रकार अपनी अज्ञानता के कारण संसार चक्र में भटकता रहता है और सच्चे देव-शास्त्र-गुरु की पहचान कर इससे कैसे मुक्त हुआ जा सकता है।

इस पूरे अध्ययन सत्र का संचालन सांगानेर (जयपुर) से आए प्रतिष्ठित विद्वान अभिषेक जैन शास्त्री “आयांश”, विद्वान शरद जैन शास्त्री एवं रायपुर के विद्वान सौरभ जैन शास्त्री के कुशल मार्गदर्शन में सुचारू रूप से किया जा रहा है।

शिविरार्थियों के लिए प्रतिदिन की भांति शुद्ध स्वल्पाहार की व्यवस्था भी ट्रस्ट द्वारा की गई।

 

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