नई दिल्ली (विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने बुधवार को ‘विश्व मधुमक्खी दिवस-2026’ वर्चुअल माध्यम से मनाया। इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने नई दिल्ली स्थित गांधी दर्शन कार्यालय से देशभर के राज्य एवं मंडलीय कार्यालयों, मधुमक्खी पालकों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और लाभार्थियों को ऑनलाइन संबोधित किया। साथ ही केंद्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, पुणे में आयोजित ‘हनी प्रदर्शनी’ का भी वर्चुअल शुभारंभ किया गया।
‘Bee Together for People and the Planet’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में मधुमक्खियों की पर्यावरण संरक्षण, कृषि उत्पादकता और जैव विविधता को सुदृढ़ बनाने में भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘श्वेत क्रांति से स्वीट क्रांति’ के विजन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन आज स्वरोजगार, खेती और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बन चुका है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्व मधुमक्खी दिवस का आयोजन वर्चुअल माध्यम से करने का निर्णय प्रधानमंत्री के ऊर्जा संरक्षण और कम संसाधनों में प्रभावी आयोजन के दृष्टिकोण के अनुरूप लिया गया। इससे अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत में कमी आई तथा देशभर से अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित हुई।
अध्यक्ष ने कहा कि जब पूरी दुनिया मधुमक्खियों के संरक्षण को लेकर चिंतित है, तब भारत ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 में गुजरात के बनासकांठा से ‘स्वीट क्रांति’ का आह्वान किया था। उसी प्रेरणा से वर्ष 2017 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने ‘हनी मिशन’ शुरू किया, जो आज ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन चुका है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अनुसार ‘हनी मिशन’ के तहत वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक देशभर में 2 लाख 46 हजार 99 बी-बॉक्स और बी-कालोनियों का वितरण किया गया है। इससे लगभग 24 हजार 269 मीट्रिक टन शहद उत्पादन को बढ़ावा मिला। वर्ष 2025-26 में अकेले 5 हजार 512 मीट्रिक टन शहद उत्पादन का अनुमान है। आयोग से जुड़े मधुमक्खी पालकों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 31 करोड़ रुपये मूल्य के शहद का निर्यात भी किया। भारतीय शहद का निर्यात अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, सऊदी अरब, ओमान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कतर और कोरिया गणराज्य सहित कई देशों में किया गया।
अध्यक्ष मनोज कुमार ने मधुमक्खी पालकों से अपील की कि वे मधुमक्खी पालन को केवल शहद उत्पादन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे प्रकृति संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि से जोड़कर देखें। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों को बी-कीपिंग से जोड़ने और प्रधानमंत्री की ‘स्वीट क्रांति’ को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में देशभर से जुड़े प्रतिभागियों ने डिजिटल माध्यम से मधुमक्खी पालन से जुड़े अपने अनुभव और सफलता की कहानियां साझा कीं। कार्यक्रम में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ, खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्रशिक्षार्थी, बैंक प्रतिनिधि तथा विभिन्न राज्यों के अधिकारी भी शामिल हुए।








