रायपुर (विश्व परिवार)।। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में सोमवार को उन्नत गणितीय मॉडलिंग एवं कम्प्यूटेशनल विधियों पर एक सप्ताह के संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। “उन्नत गणितीय मॉडलिंग एवं कम्प्यूटेशनल विधियाँ: विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में अनुप्रयोग” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन एनआईटी रायपुर के गणित विभाग द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ई एंड आईसीटी) अकादमी के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों को उन्नत गणितीय मॉडलिंग और कम्प्यूटेशनल तकनीकों के नवीनतम विकास तथा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के विभिन्न क्षेत्रों में उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना है।
उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शारदा नंदन राव ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं महत्त्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. कपिल कुमार सोनी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी की ई एंड आईसीटी अकादमी तथा दोनों संस्थानों के बीच हब-एंड-स्पोक साझेदारी की जानकारी दी। अकादमी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री फिरोजा हक ने संकाय विकास, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और संस्थागत सहयोग की भूमिका को रेखांकित किया। एनआईटी रायपुर के गणित विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत कुमार सामंत ने विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों एवं योगदान की जानकारी दी, जबकि संस्थान के कुलसचिव श्री अशोक कुमार गुप्ता ने शिक्षण और अनुसंधान में नवीन गणितीय एवं कम्प्यूटेशनल विधियों को अपनाने तथा निरंतर व्यावसायिक विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एफएसआरटीआई, हैदराबाद के निदेशक एवं प्रधान अनुसंधान वैज्ञानिक प्रो. वी. श्री हरि राव उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों से सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अपनी शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि एवं एनआईटी रायपुर के करियर डेवलपमेंट सेंटर के प्रमुख प्रो. समीर बाजपेयी ने भी प्रतिभागियों को कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान गणितीय मॉडलिंग एवं कम्प्यूटेशनल विधियों में नवीनतम प्रगति, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में उनकी उपयोगिता पर चर्चा की जाएगी। यह पहल संकाय सदस्यों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और नवाचारपरक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है। उद्घाटन सत्र का समापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नीरज मनहास के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।







