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सक्ती में पावर ग्रिड के लिए 165 एकड़ जमीन अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी; विधायक बोले- इतनी तानाशाही अंग्रेजों ने भी नहीं की

सक्ती (विश्व परिवार)। जिले के सपिया गांव में इन दिनों किसान अपनी कृषि भूमि को लेकर चिंता में डूब गए हैं। अधिकारियों ने पावर ग्रिड की स्थापना करने छोटे से सपिया गांव को चुना है, जहां छोटे-छोटे किसान खेती किसानी के भरोसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। अब उनके जीवन यापन का एक मात्र सहारा उनकी कृषि भूमि को अधिकारियों की नजर लग गई है। पावर ग्रिड स्थापित करने छोटे किसानों की जमीन पर सर्वे शुरू कर दिया गया है। हैरत की बात यह है कि अधिकारी इसकी जानकारी किसानों को भी देना जरूरी नहीं समझ रहे।
गुपचुप तरीके से कुछ दलालों को लेकर उनकी जमीनों पर सर्वे कार्य किया जा रहा है। किसानों को जब इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने कलेक्टर से उनकी जमीन को न लेने की गुजारिश की। किसानों ने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि उनके गांव की अधिकांश भूमि 100 एकड़ पहले ही कर्रापाली जलाशय बांध के लिए और जल संसाधन विभाग के नहर निर्माण के लिए 150 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है, जिससे गांव का कृषि रकबा बहुत कम हो चुका है। अब पावर ग्रिड के लिए फिर से ग्राम सपिया, फगुरम और अंजोरीपाली की कुल 165 एकड़ भूमि प्रस्तावित है। इसके बाद गांव में कृषि भूमि नहीं बचेगी। किसानों के जीवन यापन का एक मात्र सहारा उनकी जमीन है, जिसे शासन-प्रशासन छीन लेना चाहती है।
किसानों ने आंदोलन की दी चेतावनी
किसानों का कहना है कि हम सब बार बार अधिकारियों से हमारी जमीन न लेने की गुजारिश कर रहे हैं। हमने रायपुर जाकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसद ओर क्षेत्रीय विधायक सबको ज्ञापन देकर अपनी समस्या से अवगत कराया है, लेकिन इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा। अगर जनप्रतिनिधि और अधिकारी हमारा निवेदन नहीं सुन सकते तो फिर मजबूरन हमें आंदोलन करने सड़क पर उतरना होगा।
विधायक ने कहा- इतनी तानाशाही अग्रेजों ने भी नहीं की
ग्राम सपिया पहुंचे चंद्रपुर से कांग्रेस के विधायक रामकुमार यादव ने कहा कि आज हम लोग ग्राम पंचायत सपिया में आए हैं। यहां पावर ग्रिड लग रहा है। यहां के किसान कल कलेक्टर के पास ज्ञापन देने गए थे। इनका कहना है कि हम लोग पहले ही बांध में हमारी 200-250 एकड़ जमीन चली गई, फिर नहर बनने में 200 एकड़ जमीन चली गई, उसमें भी पानी नहीं मिला और जो बची-खुची उपजाऊ जमीन है, डबल फसल वाली जमीन है, उसमें अभी पावर ग्रिड बना रहे हैं। इसका किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों ने बोला है कि हम मर जाएंगे पर जमीन नहीं देंगे।
विधायक यादव ने कहा, किसी प्रकार का कोई नोटिस नहीं, कोई सूचना नहीं और जल संसाधन विभाग और पावर ग्रिड के बड़े-बड़े अधिकारी आ रहे हैं, नाप-जोख कर रहे हैं। किसान बेचारा क्या करेगा? किसान तो अपना हक के लिए आंदोलन करता है। जेल भेजना चाहते हैं तो जेल भेज दो। किसान आंदोलन से डरता थोड़ी है। ये सरकार कहती है जय जवान जय किसान और आज किसान का अपमान हो रहा है। जो लोग इमरजेंसी की बात करते हैं, आज वही लोग किसानों को बोलने नहीं दे रहे हैं।
विधायक रामकुमार यादव ने कहा कि हम तो कलेक्टर साहब से मांग करते हैं कि वे मामले को संज्ञान में लें। तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर सबको किसानों के बारे में सोचना चाहिए। ऊपर से अडानी-अंबानी का आदेश आता है और यहां नीचे गरीब किसान को उजाड़ा जा रहा है, ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

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